शशि कपूर / कहीं कुछ अनकहा !

हम शशि कपूर को आमतौर पर पृथ्वी राज कपूर के बेटे और राज कपूर के भाई के तौर पर ही जानते हैं जो अपनी पारिवारिक पृष्ठभूमि की वजह से फिल्मों में आए और अपनी प्यारी शख्सियत और भोली अदाओं की वजह से तीन दशकों तक हिंदी सिनेमा के सबसे लोकप्रिय नायकों में एक बने रहे।

पाल वाली नाव (भाग – 02)

पोखर से पूरबारी बाध की तरफ जाने के लिए मैंने फोरी में नाव को डाल दिया जिसकी चौड़ाई तकरीबन तीस फीट थी। दोनों तरफ खरही लगे हुए थे जिस का कुछ भाग पानी में तो कुछ भाग पानी से ऊपर था।

जिसके कारण मिट्टी भी चन्दन है राजस्थानी

रानी पद्मावती प्रसंग से जुड़े पंडित नरेंद्र मिश्र की लोकप्रिय कविता ‘पद्मिनी-गोरा-बादल‘ “दोहराता हूँ सुनो रक्त से लिखी हुई क़ुरबानी, जिसके कारण मिट्टी भी चन्दन है राजस्थानी ।” डॉ कुमार विश्वास द्वारा इस कविता की प्रस्तुती का विडियो भी आवश्य देखें !

मैं हूँ दरभंगा का ऐतिहासिक किला

मैं हूँ दरभंगा का ऐतिहासिक किला लगभग 85 एकड़ जमीन के चारों ओर  फैला हुआ हूँ । मेरी ऊँचाई दिल्ली के लाल किले से भी 9 फीट ऊंची है । पर नसीब अपना-अपना !

संत रविदास और पथिक – प्रेरक प्रसंग

सुमिरन करते हुए अपने कार्य में तत्लीन रहने वाले संत रविदास जी आज भी अपने जूती गांठने के कार्य में तल्लीन थे, अरे..! मेरी जूती थोड़ी टूट गई है इसे गाँठ दो.. राह गुजरते एक पथिक ने  रविदास जी से थोड़ा दूर खड़े हो कर कहा ।

होती है गलतफहमी, टूट जाते हैं रिश्ते

एक जौहरी के निधन के बाद उसका परिवार संकट में पड़ गया । खाने के भी लाले पड़ गए । एक दिन उसकी पत्नी ने अपने बेटे को नीलम का एक हार देकर कहा – ‘बेटा, इसे अपने चाचा की दुकान पर ले जाओ । कहना इसे बेचकर कुछ रुपये दे दें । बेटा वह

“संजीदा” पति चाहिए “खरीदा” हुआ नहीं

पटना विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान में स्नातकोत्तर शालिनी झा अपनी माँ को पत्र लिखती हैं, जिसमें  मध्यमवर्गीय परिवार की औसत लडकियाँ प्रेषक की भूमिका में प्रतीत हो रहीं हैं । “संजीदा“ पति चाहिए “खरीदा“ हुआ नहीं ।

पाल वाली नाव (भाग – 01)

मैं नाव के अगले माईन पर बैठा था और मेरी नजरें जलकुंभी के फूलों पर टिकी थी जो धीरे-धीरे मेरे पास आती जा रही थी । करमी के फूलों की पृष्ठभूमि में उसकी खूबसूरती और बढ़ गई थी।

मेरा चेहरा भी है, ज़ुबान भी है !

क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि लकड़ी की बनी कोई मूर्ति ग्यारह हज़ार साल तक सही-सलामत रह सकती है ? लकड़ी की बनी ऐसी ही एक मूर्ति सवा सौ साल पहले साइबेरियाई पीट बोग के शिगीर में मिली थी जिसे आरंभिक जांच के बाद साढ़े नौ हज़ार साल पुराना घोषित किया गया था।
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