महान दार्शनिक अरस्तु महोदय ..


Aristotle imageप्रिय पाठकों प्रस्तुत है, महान दार्शनिक Aristotle/अरस्तु महोदय का प्रेरणात्मक विचार , इनका जन्म 384 BC और अवसान 322 BC में हुआ था ये ग्रीक साम्राज्य के रहने वाले थे, ये प्लेटो के शिष्य थे, सिकंदर के गुरु एवं पश्चिमी दर्शनशास्त्र के महान व्यक्ति थे । इनके अनुसार……..

संसार की प्रत्येक वस्तु अच्छी है

अरस्तु महोदय कहते है की  “जब हम किसी वस्तु के निकट होते हैं, तो उसकी अच्छाई और उत्कृष्टता को महसूस कर सकते हैं, लकिन हम सब में अच्छाई का स्तर एक समान नहीं होता, इसी कारण अच्छाई एक सार्वभौमिक सत्य होते हुए भी अपने विविध स्तरों के कारन किसी एक स्पष्ट विचार का प्रतिनिधित्व नहीं कर पाती । यहाँ तक की दुनिया में अगर अच्छाई या उत्कृष्टता का कोई एक सर्वभौमिक मानक होता, तो भी मनुष्य उसे प्राप्त  नहीं कर सकता था।”

उत्कृष्टता एक कला है …

इनका विचार यह है की  “उत्कृष्टता वो  कला है, जो प्रशिक्षण और आदत से आती है । हम इसलिए सही कार्य नहीं करते की हमारे अंदर अच्छाई या उत्कृष्टता है, बल्कि वो हमारे अंदर इसलिए है, क्योंकि हमने सही कार्य किया है । हम वो हैं, जो हम बार-बार करते हैं, इसलिए उत्कृष्टता कोई कार्य नहीं, बल्कि एक आदत है।” मनुष्य के सभी कार्य इन सातों में से किसी एक या अधिक वजहों से होते हैं  – “मौका , प्रकृति , मजबूरी , आदत , कारन , जुनून , इच्छा ।” 

               “अपने दुश्मनों पर विजय पाने वाले की तुलना में में उसे शूरवीर मानता हूँ, जिसने अपनी इच्छओं पर विजय प्राप्त कर ली है, क्योंकि सबसे कठिन विजय अपने आप होती है ।”                                                                                                                                                     अरस्तू  

अरस्तु महोदय के कुछ अनमोल विचार

  • किसी मनुष्य का स्वभाव ही उसे विश्वसनीय बनाता है, न कि उसकी सम्पत्ति ।

  • दोस्तों के बिना कोई भी जीना नहीं चाहेगा, चाहे उसके पास बाकि सब कुछ हो ।

  • मनुष्य के सभी कार्य इन सातों में से किसी एक या अधिक वजहों से होते हैं: मौका, प्रकृति, मजबूरी, आदत, कारण, जुनून, इच्छा । 

  • मनुष्य अपनी सबसे अच्छे रूप में सभी जीवों में सबसे उदार होता है, लेकिन यदि कानून और न्याय न हो तो वो सबसे खराब बन जाता है ।

  • कोई भी क्रोधित हो सकता है- यह आसान है, लेकिन  सही व्यक्ति से, सही सीमा में, सही समय पर और सही उद्देश्य के साथ सही तरीके से, क्रोधित होना सभी के बस कि बात नहीं है और यह आसान नहीं है ।

  • शिक्षा की जड़ें कड़वी होती है लेकिन फल मीठे होते है । शिक्षित मन की यह पहचान है की वो किसी भी विचार को स्वीकार किए बिना उसके साथ सहज रहे ।

  • हमारे जीवन के गहनतम अंधकार के वक़्त हमें अपना ध्यान रोशनी देखने पर केंद्रित करना चाहिए ।

  • सीखना कोई बच्चों का खेल नहीं है, हम बिना दर्द के नहीं सीख सकते है ।

  • अच्छा लिखने के लिए खुद को एक आम इंसान की तरह व्यक्त करो, लेकिन सोचो एक बुद्धिमान आदमी की तरह ।

  • बुद्धिमान आदमी बोलता है क्योंकि उसके पास कहने के लिए कुछ होता है जबकि मुर्ख आदमी बोलता है क्योंकि उसे कुछ कहना होता है ।

  • जितना ज्यादा आप जानोगे, उतना ज्यादा आप यह जानोगे की आप कुछ भी नहीं जानते ।

  • वो जो बच्चों को शिक्षित करते हो वो उन्हें पैदा करने वालो से ज्यादा सम्मानीय है क्योकि वो उन्हें केवल ज़िन्दगी देते है जबकि वो उन्हें सही तरीके से ज़िन्दगी जीने की कला सीखाते है ।

  • साहस सभी मानवीय गुणों में प्रथम है क्योंकि यह वो गुण है जो आप में अन्य गुणों को विकसित करता है ।

  • आदमी एक लक्ष्यों की मांग करने वाला प्राणी है उसकी ज़िन्दगी का तभी अर्थ है जब वो अपने लक्ष्यों के लिए प्रयास करता रहे और उन्हें प्राप्त करता रहे ।

  • बुद्धिमान का उद्देश्य ख़ुशी को सुरक्षित रखना नहीं होता है बल्कि दुःख को दूर रखना होता है ।

  • जो अपने डर को जीत लेता है वो सही अर्थों में मुक्त होता है ।

  • आलोचना से बचने का एक ही तरीका है : कुछ मत करो, कुछ मत कहो और कुछ मत बनों ।

  • अपने आप को जानना ही ज्ञान की शुरुआत है ।

  • पचास दुश्मनो का एन्टीडोट एक मित्र है।

 

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