पूर्वाग्रह – एक प्रसंग


Bias hindi story

आई सी यू के बाहर बेंच पर बैठी प्रभा जी नम आंखों से अपने बेटे अखिल और बहु को डॉक्टरों से बात करते और दौड़ भाग करते देख रही थीं । देख रही थीं कि ये जीन्स और टी शर्ट पहनने वाली बहु स्नेहा, जिस से उनके बेटे ने 5 वर्ष पूर्व प्रेम विवाह किया था, किस तरह ससुर जी की सेवा में जुटी हुई थी ।

उनकी आँखें नम केवल इसलिए नहीं थी कि पति राजेन्द्र जी हार्ट अटैक की वजह से एडमिट थे, बल्कि इसलिए भी की पूर्वाग्रह के चलते उन्होंने कभी अपनी इस मॉर्डन बहु से अच्छा व्यवहार नही किया । दो महीने पहले जब वो बेटे की ज़िद पे उसके साथ कुछ दिन बिताने आयी । सोच के आयीं थीं कि ज़्यादा दिन न रहेंगी, इतनी मॉर्डन बहु, जाने कैसा बर्ताव करे ।

बोए जाते हैं बेटे, उग जाती है बेटियाँ

बहु का रहन-सहन पहनावा देख के मन ही मन बहुत नाराज हुईं । लेकिन कुछ न कहा । बहु उनके उठने से पहले उठ जाती, योगा करती और झटपट तैयार हो जाती । मांगने से पहले हाथ में चाय मनपसंद नाश्ता । पापाजी के स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए तरह-तरह के व्यंजन बनाती । पापाजी की दवाइयों का पर्चा तो ज़बानी याद हो गया था उसे । समय से अखिल का टिफ़िन, नातिन परी को स्कूल छोड़ना । कितना कुछ करती, लेकिन काम करने के तरीके बिल्कुल अलग थे । बड़े ही मॉर्डन !

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प्रभाजी के साथ बैठ के गप्पे लड़ाने का बहुत मन करता स्नेहा का, लेकिन उनके स्वभाव का रूखापन उसे चुप कर देता । घर सुंदर सुव्यवस्थित रखती । घर से ही आफिस का काम करती थी, परी के लिए घर से ही काम करना चुना । ये सब देख के प्रभाजी का मन खुश होता ज़रूर । लेकिन जब स्नेहा को देखतीं, सोचतीं “दिनभर टी शर्ट और लोअर पहने घूमती है । पूजा भी उसमें ही करती है! सिर पे दुपट्टा डाल के । ये भी कोई तरीका हुआ भला । कितनी बड़बड़ करती है । अंग्रेज़ी क्या बोलती है बहुत होशियार समझती है खुद को । मैं तो न आने वाली अगली बार।”

“संजीदा” पति चाहिए “खरीदा” हुआ नहीं

लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया हर पूर्वाग्रह गलत साबित होता गया, लेकिन एक परंपरावादी सास का अहम ही था जो उन्हें स्नेहा को गले लगाने से रोक रहा था । तभी कंधे पर स्नेह के स्पर्श से उनकी तंद्रा टूटी। प्रभाजी समझ चुकी थी कि लिहाज़ और सम्मान साड़ी और सिर पे पल्लू के मोहताज नहीं होते । दिल से आते हैं । “मम्मी, पापाजी बिल्कुल ठीक हैं । माइनर अटैक ही था । आप बिल्कुल मत रोइये।” इससे पहले की स्नेहा आगे कुछ कह पाती, प्रभाजी ने उसे गले लगा लिया । स्नेहा चुप हो गयी । प्रेमाश्रुओं की गर्मी से दिलों में जमी बर्फ पिघल रही थी ।


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