Category: व्यक्ति विशेष विशेषांक ….

शहंशाह-ए-तरन्नुम – मोहम्मद रफ़ी

शहंशाह-ए-तरन्नुम – मोहम्मद रफ़ी हिंदी सिनेमा के श्रेष्ठतम पार्श्व गायकों में से एक थे। आईये इनके पुण्यतिथि पर  पढ़ते एवं सुनते हैं इनके प्रिसिद्ध संगीत 

महान वैज्ञानिक Albert Einstein महोदय के 21 अनमोल विचार

महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन का जन्म 14 मार्च 1879 को जर्मनी में हुआ था । भोतिकी विज्ञान के क्षेत्र में सापेक्षता के सिद्धांत और द्रव्यमान-ऊर्जा समीकरण E = m c 2 के लिए जाने जाते हैं । इन्हें सैद्धांतिक भौतिकी, खासकर प्रकाश-विद्युत ऊत्सर्जन की खोज के लिए 1921 में नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया । आईये पढ़ें इनके 21 अनमोल

आ बैल मुझे मार !

हमारे यहाँ जिंदगी कॉस्ट कटिंग से शुरू होती है और कॉस्ट कटिंग से लेकर सेविंग तक जाकर खत्म हो जाती है । घर-घर की यही कहानी है । ना जाने यहाँ इंसान पैदा होने से लेकर मरते दम तक खोया-खोया  सा रहता है ।

बुढ़िया,हँसुआ,घास और विकास !

दोपहर बीत चुकी है । फागुन की ठंडी हवाओं ने कब करवट ली और चैत्र मास के लूँ के थपेड़ों ने मन को विचलित करना शुरू कर दिया यह पता ही नहीं चला । दलान से…

जाति नहीं व्यव्स्था बदलो !

उस दलित बस्ती के चौक पर बैठकर ब्राह्मण होने के कारण हमने जितनी गालियां सुनी थी उसकी कल्पना हमने सपनों में भी नहीं की थी । सच कहूं उस दिन मुझे पता चला मैं ब्राह्मण हूं, नहीं तो देश के विभिन्न…

हम मिथिला के विकास के लिये माँगते हैं ।

अब कानों को सुनने से तो नहीं रोक लीजिएगा, तो हमने भी सुन लिया । यूं ही चलते चलते कोई कह रहा था कि हम मांगते हैं । जी हाँ पैसा । जब कानों ने सुन ही लिया तो दिल और दिमाग पर क्या बिता होगा वह तो पता नहीं लेकिन बता दूं…

चट्टानी एकता जरूरी है मिथिला के विकास के लिए !

आज यह सवाल उठता है कि हम पिछड़े क्यों ? पूरे विश्व की सबसे उपजाऊ मिटटी बंजर कैसे हो गई ? पलायन घर घर की कहानी कैसे बन गई ? हमारे मां, बाप, भाई, बहन की आंखें रेलवे स्टेशन को….

चुपचाप कम्बल ओढ़ घी पीते रहिये !

ऐसा कभी होता नहीं था । समय बदला जिम्मेवारी बदली और फिर यूँ लगा कि आसपास का पूरा संसार ही बदल गया । हर पल गुस्सा आना, मुहं से गाली निकलना, चिड़चिड़ापन जीवन का एक अंग बन गया । सुहाने सपने….

बालकनी के प्रेम कथा का निर्दयी अंत !

दिसम्बर के धुप में यूँ ही बालकनी के दूसरी तरफ मुड़ बैठ गया था | बादलों के बीच सूरज की आँख मिचौली में बालकनी की ठंडी हवा मन को मोह रही थी | एकाएक नजरें उठी और दूर के बालकनी पर जाकर अटक गई | एक खूबसूरत जवान कन्या !

राशन कार्ड ….

सीना ठीक कर उस अधेर उम्र के व्यक्ति ने भड़ी बस में बोला था । सरकार राशन बँटना बंद करे । दिल तो मेरा भी मचला, दिमाग में गुस्सा को साया लहराने लगा जबाब देने को, उलझा तो था ही परंतु कुछ सोच पीछे हट गया …..