Category: साहित्य

पाल वाली नाव (भाग – 02)

पोखर से पूरबारी बाध की तरफ जाने के लिए मैंने फोरी में नाव को डाल दिया जिसकी चौड़ाई तकरीबन तीस फीट थी। दोनों तरफ खरही लगे हुए थे जिस का कुछ भाग पानी में तो कुछ भाग पानी से ऊपर था।

पाल वाली नाव (भाग – 01)

मैं नाव के अगले माईन पर बैठा था और मेरी नजरें जलकुंभी के फूलों पर टिकी थी जो धीरे-धीरे मेरे पास आती जा रही थी । करमी के फूलों की पृष्ठभूमि में उसकी खूबसूरती और बढ़ गई थी।
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