Category: Hindi Literature / हिंदी साहित्य

पाल वाली नाव (भाग – 02)

पोखर से पूरबारी बाध की तरफ जाने के लिए मैंने फोरी में नाव को डाल दिया जिसकी चौड़ाई तकरीबन तीस फीट थी। दोनों तरफ खरही लगे हुए थे जिस का कुछ भाग पानी में तो कुछ भाग पानी से ऊपर था।

पाल वाली नाव (भाग – 01)

मैं नाव के अगले माईन पर बैठा था और मेरी नजरें जलकुंभी के फूलों पर टिकी थी जो धीरे-धीरे मेरे पास आती जा रही थी । करमी के फूलों की पृष्ठभूमि में उसकी खूबसूरती और बढ़ गई थी।

रामधारी सिंह दिनकर – कुरुक्षेत्र

रामधारी सिंह दिनकर का जन्म : 23 सितम्बर 1908 को बिहार के मुंगेर जिला के सिमरिया में हुआ था । दिनकर जी वीर रस के सर्वश्रेष्ठ कवि के रूप में प्रख्यात हुए । इन्हें पद्मभूषण, साहित्य अकादमी तथा भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से नवाजा गया । आईये पढ़ें इनके काव्य “कुरुक्षेत्र” का कुछ अंश जिसमें इन्होंने युद्ध को क्रूर

पांडव का संदेश – रामधारी सिंह दिनकर

 प्रिय पाठकों प्रस्तुत है रामधारी सिंह “दिनकर” की ए रचना…….. “वर्षों तक वन में घूम-घूम, बाधा-विघ्नों को चूम-चूम, सह धूप-घाम, पानी-पत्थर, पांडव आये कुछ और निखर।

दुष्यंत कुमार

मित्रों प्रस्तुत है, दुष्यंत कुमार की लोकप्रिय प्रेरणात्मक कविताएँ ……… ” हो गई है पीर- पर्वत सी । कुछ भी बन बस , कायर मत बन । और ये जो शहतीर है ।“  “सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं,                                

मशहुर शायरियाँ और शायर

प्रिय पाठकों प्रस्तुत है, दुनियां के मशहुर शायरों की प्रेरणात्मक शायरियाँ …जिनमें मिर्ज़ा ग़ालिब, मोहम्मद इक़बाल, अकबर इलाहाबादी, मुनव्वर राणा, बशीर बद्र, अहमद फ़राज, जौहर, अख्तर अंसारी, बहज़ाद लखनवी, फ़िराक, गुलज़ार…इत्यादि शायरों की शायरियाँ….
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