Ruchi Smriti vicharbindu

हमारे बुजुर्ग और उनकी अहमियत – रूचि स्मृति

संयुक्त परिवार की परिभाषा जो समाजशास्त्र में दी जाती है उस हिसाब से संयुक्त परिवार अब रह नहीं गया । परिवार में कमरे साथ वाले हैं परन्तु उसमें निवास करने […]

Ripunjay Kumar Thakur

पूर्व मध्यकालीन भारतीय इतिहास लेखन : एक समालोचनात्मक अध्ययन

पूर्व-मध्यकालिन भारत का इतिहास मानव संस्कृति के एक वृहद्-कालीन संक्रान्ति के पहियों पर स्थित था, जिसका अध्ययन किसी भी समाजशास्त्री को उसके मूल प्रवृति के अनुसार आकर्षित करता है । पूर्व-मध्यकालिन […]

somu anand vicharbindu

अंग्रेज़ी का विरोध नहीं बल्कि इसके मुक़ाबले हिंदी की बड़ी लक़ीर खींचनी होगी

 ‘क्या महत्वपूर्ण बातें सिर्फ इंग्लिश में होती हैं ?’ दरअसल, यह सवाल सिर्फ़ इंग्लिश-विंग्लिश की श्रीदेवी का ही नहीं बल्कि मेरा और मेरे जैसे करोड़ों भारतीय का है । आज […]

Hindi vbc

हिंदी के विकास से ही राष्ट्र का सामरिक विकास संभव है

किसी भी देश के विकसित होने में भाषा का बड़ा योगदान होता है । हर देश की एक आधिकारिक भाषा होती है, जिसे राष्ट्रभाषा कहते है । देश में सामान्यतः […]

shardindu chaudhary

और राजनीति मुस्कुराने लगती है…

हैंडसम वेतन, असीमित भत्ता और मात्र पांच वर्ष की सेवा के एवज में जीवन भर पेंशन । सेवा अवधि में असत्य वचन, झूठे वादे और जनता को भरमाने की खुली […]

arunabh.saurabh

चीख़ में तब्दील किलकारी के नेपथ्य का दर्द

मोटी रकम वसूलने वाले पब्लिक स्कूल क्या हमारे बच्चों की जान सुरक्षित रखने के प्रति संवेदनशील है? कुकुरमुत्ते की तरह हर शहर-कस्बे में उग आए पब्लिक स्कूल हमारे बच्चे को […]

Indian Police

‘पुलिसिया पंचतंत्र – भेड़िये और जनता की कहानी’ ।

विचार बिंदु  के इस अंक में प्रस्तुत है, हमारे पुलिस महकमे में व्याप्त भ्रष्टाचार की वजहों और निदान के रास्तों की पड़ताल करता कवि, लेखक व पूर्व आईपीएस अधिकारी   […]

Flood Streets in Bihar - Issues and Solutions

बिहार में बाढ़ का कहर- मुद्दा, स्वरुप और समाधान

रात को पानी की आवाज़ बहुत भयानक होती है, दूर कहीं चर-चाँचर में पानी गिरने की आवाज़, कुत्ते-बिल्लियों के क्रंदन और खूटें पर बंधे मवेशी की छटपटाहट बहुत डरावनी होती […]

betiyaan

बोए जाते हैं बेटे, उग जाती है बेटियाँ

“बोए जाते हैं बेटे, उग जाती है बेटियाँ”, विचार बिंदु के इस अंक में प्रस्तुत है दिल्ली विश्व-विद्यालय से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर कर रहीं रचना झा का आलेख “बेटियाँ” ।

man me umarta yaado ka sawan

मन में उमड़ता यादों का सावन

डायरी के पन्नों से  – ‘मन में उमड़ता यादों का सावन’, विश्व साहित्य से लेकर अपने लोक भाषा के साहित्य में रूचि रखने वाले बालमुकुन्द एक समीक्षक, आलोचक, कवि एवं प्रेम […]