जब बिजली गिरे ! तो क्या करें ?

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मित्रों ! राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण भारत सरकार द्वारा जारी किया गया सूचना जो जनहित में है । हम सभी इसे ध्यानपूर्वक पढ़े और अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचायें । जब बिजली गिरे ! तो क्या करें ? Continue reading “जब बिजली गिरे ! तो क्या करें ?”

माँ मैं मर रही हूँ, बचा लो मुझे !!!!

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माँ कैसी हो तुम ? रो मत ! ये जो भी हुआ ये सब कैसे माँ ? तुम तो कहती थी पापा हमेशा मेरी रक्षा करेंगे , भैया मुझे कुछ नहीं होने देंगे | पूरा समाज है हमारे साथ | पर सुनो माँ , मैं सच कह रही हूँ , कोई हमारा नहीं , लड़की बस शरीर है इनके लिए | मार डाला इन्होंने मुझे , मेरी नस नस काट डाली | Continue reading “माँ मैं मर रही हूँ, बचा लो मुझे !!!!”

खेतों की खैरियत

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खेतों की खैरियत जानने मैं अनायस खेतों की तरफ बढ़ चला । दूर से हरे लहलहाते खेत वास्तविक उपज से अधिक का भ्रम पैदा कर रहे थे । मैं नजदीक पहुँचा ही था कि ३” चैौड़ी दरारों को देखकर उम्मीदें दरकने लगी ।

बरबस नजर उपर की ओर आकाशी गंगा को खोजने लगी । सूर्यदेव आग उगल रहे थे । जल के कृत्रिम श्रोत दिख नहीं रहे थे । हवा के होश उड़े थे । न जाने पिछले दिनों हुई वह कौन सी बदरंग बादलों की तेजाबी वर्षा थी जो फसलों को गला रही थी । धरती के कोख को कौन पोसे ? दम तोड़ती फसलों पर व्याधि स्पष्ट दिख रहे थे ।

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कीट प्रबंधन के मकड़ा जाल में फसा मैं स्वयं को असहज महसूस करते हुए वहीं मेड़ पर बैठ लागतों और संभावित उपज के अर्थशास्त्र में उलझ गया । यह सत्य तीव्रता से उद्भासित होने लगा कि कैसीनो जाना और खेतों पर जाना एक ही बात है । मिट्टी के विषय में सोचने की अंतिम परिणति मिट्टी में मिल जाना है तन से, मन से, धन से, विचारों से भी …….


मुझे एकाएक कभी पढ़ीं बाते याद आ गई

हमारे देश के वित्त मंत्री ने कहा
किसानो को लिए गए कर्ज़ का
नियोजन करना नहीं आता
इसीलिए किसान खुदकुशी करते हैं

किसानों ने पूछा
देश का नियोजन अबतक नही जमा
इसके लिए कितने मंत्रियों ने
खुदकुशी की है ।

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कृषकों के सम्मान में छंद रचना, राजनीति में जयकारे, व्यापारियों का खुले मंच से महिमा मंडन आखिर जुआ जैसी खराब लत के कारण कैसे होती है ? सोचते हुए मैंने पाया इस षडयंत्र में सभी शामिल हैं । ये बदमाशों की वो टोली हैं जो बिना श्रम कृषकों के पसीने की कमाई येन केन प्रकारेण हड़प रहे हैं और अपनी प्रशंसाओं से उसे ऐसा करते रहने को उकसा रहे हैं । लागत से कम मूल्य पर उत्‍पादों को बेचनेे की विवशता की नीति बनाकर लागू करने करवाने की साजिश इनकी ही है । उस पर तूर्रा खाद्य सुरक्षा योजना ………

अलाभकारी कार्यों में लगे इतने अधिक मानव संसाधन को हटाकर उत्पादक लाभकारी कार्यों में लगाया जाए तभी षड्यंत्रकारी भूख को समझ सकेंगे । जो उन्हे अप्रत्यक्ष रूप से उकसा कर अपने भोजन पानी का इन्तजाम करते हैं उनपर भारतीय कानून की धारा लगनी चाहिए ॥


लेखकनिशिकांत ठाकुर 


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मिर्ज़ा असद-उल्लाह बेग ख़ां उर्फ “ग़ालिब” की कुछ जीवंत रचनाएँ

Mirza Ghalib vicharbindu

उर्दू के सर्वकालिक महान शायर मिर्ज़ा ग़ालिब की पुण्यतिथि पर, उनकी कुछ जीवंत रचनाएँ । इनका जन्म – 27 दिसंबर, 1796 ( आगरा, उत्तर प्रदेश ) एवं अवसान – 15 फरवरी, 1869 ( दिल्ली ) में हुआ ।  Continue reading “मिर्ज़ा असद-उल्लाह बेग ख़ां उर्फ “ग़ालिब” की कुछ जीवंत रचनाएँ”

IQ तथा EQ का संतुलन आवश्यक है

Ruchi Smriti
IQ” word जर्मन शब्द Intelligenz-Quotient से निकला है जिसका पहली बार use जर्मन Psychologist  विलियम स्टर्न ने 1912 मे किया। IQ यानी intelligent quotient आपके सोचने-समझने और knowledge हासिल करने से जुड़ा है। हम दिमागी तौर पर किसी काम को कितने बेहतर तरीके से कर सकते हैं, यह तय करता है।

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कुछ बातें जो स्मार्ट लोगो को पता होना चहिये

Some things that smart people should know about

शांतिपूर्वक जीवन जीने के लिए ऐसी कई बातें हैं जिनके बारे में आपको पता होना चाहिए । आईये Vichar Bindu के इस कंटेंट में जानते हैं “कुछ बातें जो स्मार्ट लोगो को पता होना चहिये “ Continue reading “कुछ बातें जो स्मार्ट लोगो को पता होना चहिये”

हे हंसवाहिनी से गजबे कमर लचके तक

Worship or obscenity

हमारे समाज मे सभ्य लोगों का एक ऐसा भी समूह होता है जो बरसाती बेंग की तरह केवल दूर्गा पूजा, काली पूजा और सरस्वती पूजा के अवसर पर ही दृष्टिगोचर होते हैं । इन भक्तों का पहला काम होता है हफ्ता वसूलने के स्टाइल में चंदा वसूलना । Continue reading “हे हंसवाहिनी से गजबे कमर लचके तक”

पुस्तकालय और प्रेरणादायक समाज

library and society
राष्ट्रीय राजमार्ग 57  मुसलसल चलती ट्रकों और बसों की धमक और शोर से हिलता एक मकान और उस मकान में अपने अपने किताबों में मशरूफ लोग, मानो उस धमक और शोर के वजूद को धता बता रहे हों । ये तस्वीर है यदुनाथ सार्वजनिक पुस्तकालय की, और ये अवस्थित है झंझारपुर अनुमंडल मुख्यालय से 10 किमी पश्चिम लालगंज (पैटघाट) गांव में, नेशनल हाइवे के ठीक नीचे ।

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मैं हूँ दरभंगा का ऐतिहासिक किला

darbhanga fort

मैं हूँ दरभंगा का ऐतिहासिक किला लगभग 85 एकड़ जमीन के चारों ओर  फैला हुआ हूँ । मेरी ऊँचाई दिल्ली के लाल किले से भी 9 फीट ऊंची है । पर नसीब अपना-अपना ! Continue reading “मैं हूँ दरभंगा का ऐतिहासिक किला”

मेरा चेहरा भी है, ज़ुबान भी है !

Image of Shigger Idol

क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि लकड़ी की बनी कोई मूर्ति ग्यारह हज़ार साल तक सही-सलामत रह सकती है ? लकड़ी की बनी ऐसी ही एक मूर्ति सवा सौ साल पहले साइबेरियाई पीट बोग के शिगीर में मिली थी जिसे आरंभिक जांच के बाद साढ़े नौ हज़ार साल पुराना घोषित किया गया था। Continue reading “मेरा चेहरा भी है, ज़ुबान भी है !”