Category: Miscellaneous / विविध

जब बिजली गिरे ! तो क्या करें ?

मित्रों ! राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण भारत सरकार द्वारा जारी किया गया सूचना जो जनहित में है । हम सभी इसे ध्यानपूर्वक पढ़े और अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचायें । जब बिजली गिरे ! तो क्या करें ?

माँ मैं मर रही हूँ, बचा लो मुझे !!!!

माँ कैसी हो तुम ? रो मत ! ये जो भी हुआ ये सब कैसे माँ ? तुम तो कहती थी पापा हमेशा मेरी रक्षा करेंगे , भैया मुझे कुछ नहीं होने देंगे | पूरा समाज है हमारे साथ | पर सुनो माँ , मैं सच कह रही हूँ , कोई हमारा नहीं , लड़की

खेतों की खैरियत

खेतों की खैरियत जानने मैं अनायस खेतों की तरफ बढ़ चला । दूर से हरे लहलहाते खेत वास्तविक उपज से अधिक का भ्रम पैदा कर रहे थे । मैं नजदीक पहुँचा ही था कि ३” चैौड़ी दरारों को देखकर उम्मीदें दरकने लगी । बरबस नजर उपर की ओर आकाशी गंगा को खोजने लगी । सूर्यदेव

मिर्ज़ा असद-उल्लाह बेग ख़ां उर्फ “ग़ालिब” की कुछ जीवंत रचनाएँ

उर्दू के सर्वकालिक महान शायर मिर्ज़ा ग़ालिब की पुण्यतिथि पर, उनकी कुछ जीवंत रचनाएँ । इनका जन्म – 27 दिसंबर, 1796 ( आगरा, उत्तर प्रदेश ) एवं अवसान – 15 फरवरी, 1869 ( दिल्ली ) में हुआ । 

IQ तथा EQ का संतुलन आवश्यक है

IQ” word जर्मन शब्द Intelligenz-Quotient से निकला है जिसका पहली बार use जर्मन Psychologist  विलियम स्टर्न ने 1912 मे किया। IQ यानी intelligent quotient आपके सोचने-समझने और knowledge हासिल करने से जुड़ा है। हम दिमागी तौर पर किसी काम को कितने बेहतर तरीके से कर सकते हैं, यह तय करता है।

कुछ बातें जो स्मार्ट लोगो को पता होना चहिये

शांतिपूर्वक जीवन जीने के लिए ऐसी कई बातें हैं जिनके बारे में आपको पता होना चाहिए । आईये Vichar Bindu के इस कंटेंट में जानते हैं “कुछ बातें जो स्मार्ट लोगो को पता होना चहिये “

हे हंसवाहिनी से गजबे कमर लचके तक

हमारे समाज मे सभ्य लोगों का एक ऐसा भी समूह होता है जो बरसाती बेंग की तरह केवल दूर्गा पूजा, काली पूजा और सरस्वती पूजा के अवसर पर ही दृष्टिगोचर होते हैं । इन भक्तों का पहला काम होता है हफ्ता वसूलने के स्टाइल में चंदा वसूलना ।

पुस्तकालय और प्रेरणादायक समाज

राष्ट्रीय राजमार्ग 57  मुसलसल चलती ट्रकों और बसों की धमक और शोर से हिलता एक मकान और उस मकान में अपने अपने किताबों में मशरूफ लोग, मानो उस धमक और शोर के वजूद को धता बता रहे हों । ये तस्वीर है यदुनाथ सार्वजनिक पुस्तकालय की, और ये अवस्थित है झंझारपुर अनुमंडल मुख्यालय से 10

मैं हूँ दरभंगा का ऐतिहासिक किला

मैं हूँ दरभंगा का ऐतिहासिक किला लगभग 85 एकड़ जमीन के चारों ओर  फैला हुआ हूँ । मेरी ऊँचाई दिल्ली के लाल किले से भी 9 फीट ऊंची है । पर नसीब अपना-अपना !

मेरा चेहरा भी है, ज़ुबान भी है !

क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि लकड़ी की बनी कोई मूर्ति ग्यारह हज़ार साल तक सही-सलामत रह सकती है ? लकड़ी की बनी ऐसी ही एक मूर्ति सवा सौ साल पहले साइबेरियाई पीट बोग के शिगीर में मिली थी जिसे आरंभिक जांच के बाद साढ़े नौ हज़ार साल पुराना घोषित किया गया था।
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