कम्बोडिया और अंगकोर : मेरा प्रवास

Cambodia and Angkor

सोशलिज्म कितना खूनी हो सकता है ? पूंजीवाद कितना खूनी हो सकता है ? किसी देश के इतिहास का एक ऐसा कालखंड जब विभिन्न विचारधाराओं के एक के बाद एक इम्प्लीमेंटेशन ने  ३० लाख  (कुल आबादी का २१%) लोग मार दिए ।   कुछ आंकड़ों पर नज़र डालें।  कम्बोडिया को फ्रेंच उपनिवेशवाद से १९५३ में आजादी मिली। राजसत्ता वापस कम्बोडिया के राजकुमार सिंहनूक के हाथ में गयी।   Continue reading “कम्बोडिया और अंगकोर : मेरा प्रवास”

काबर झील पक्षी अभयारण्य

Kanwar Lake Bird Sanctuary

क्षेत्र है बेगूसराय के मंझौल अनुमंडल में अवस्थित काबर झील का जो एशिया के सबसे बड़े मीठे पानी के झील में से एक माना जाता है. Continue reading “काबर झील पक्षी अभयारण्य”

काशी – यात्रावृतांत

kashi_mnikarnika

अभी काशी से विदा भी नहीं हुआ था कि कूची मष्तिष्क के अंतरपटल पर हर्ष की स्याही से क्षणों को दकीचे जा रहा था । पेट से माथे तक बबंडर उठा हुआ था । लेखक मन व्याकुल था, बार-बार कोशिस करता था और शब्द अव्यवस्थित हो रहे थे । मैं हर क्षण को शब्दों की चादर में छुपाकर आप तक सहेजकर लाना चाहता था । Continue reading “काशी – यात्रावृतांत”

छोटकी भौजी

chotki bhouji vicharbindu

आमतौर पर मेरा दिल्ली से प्रेम का एक वजह आप मेट्रो का होना कह लिजिये । इसने इस घुम्मकर किस्म के इन्सान को एक ठौर दिया । और समझ लीजिये उसे और घुमने के लिए उकसाने का भी काम किया । कोई 10 बजे सुबह का समय रहा होगा । Continue reading “छोटकी भौजी”

चप्पल-जूता छुआ-छुत और जाति-धर्म

vicharbindu chppl juta lekh

 

समान्य श्रेणी और पूर्ववत् पधारे सहयात्री के बीच जोरो-आजमाइश करते हुए उचित स्थान काफी मसक्कत से ग्रहण किया उपरी पाईदान (सोने वाली सिट ) पर बैठ गया कुछ देर के उपरांत देखा ! Continue reading “चप्पल-जूता छुआ-छुत और जाति-धर्म”