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हम मिथिला के विकास के लिये माँगते हैं ।

we beg for the devlopment of Mithila.अब कानों को सुनने से तो नहीं रोक लीजिएगा, तो हमने भी सुन लिया । यूं ही चलते चलते कोई कह रहा था कि हम मांगते हैं । जी हाँ पैसा । जब कानों ने सुन ही लिया तो दिल और दिमाग पर क्या बिता होगा वह तो पता नहीं लेकिन बता दूं… (more…)

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मैथिल बुद्धिजीवीयों की विडम्बना !

double stander of maithil mentorsभूख, कुपोषण, दरिद्रता , पलायन  एवं बेरोजगारी से  त्रस्त मिथिला के लिए नए आशा का संचार करने वाली…!  मिथिला क्षेत्र की दुर्दशा को मुद्दा बनाकर मिथिला के जनमानस में पहचान बनाने वाली संगठन…. (more…)

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चट्टानी एकता जरूरी है मिथिला के विकास के लिए !

Mithila_Map-2आज यह सवाल उठता है कि हम पिछड़े क्यों ? पूरे विश्व की सबसे उपजाऊ मिटटी बंजर कैसे हो गई ? पलायन घर घर की कहानी कैसे बन गई ? हमारे मां, बाप, भाई, बहन की आंखें रेलवे स्टेशन को….

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चुपचाप कम्बल ओढ़ घी पीते रहिये !

alon_vbcऐसा कभी होता नहीं था । समय बदला जिम्मेवारी बदली और फिर यूँ लगा कि आसपास का पूरा संसार ही बदल गया । हर पल गुस्सा आना, मुहं से गाली निकलना, चिड़चिड़ापन जीवन का एक अंग बन गया । सुहाने सपने…. (more…)

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बालकनी के प्रेम कथा का निर्दयी अंत !

balcony_vbcदिसम्बर के धुप में यूँ ही बालकनी के दूसरी तरफ मुड़ बैठ गया था | बादलों के बीच सूरज की आँख मिचौली में बालकनी की ठंडी हवा मन को मोह रही थी | एकाएक नजरें उठी और दूर के बालकनी पर जाकर अटक गई | एक खूबसूरत जवान कन्या ! (more…)

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मिथिला आंदोलन PART 1

Mithila _mapमिथिला आंदोलन मुट्ठी भर लोगों का समूह बन कर रह गया है । अगर आप गिनती करें तो 100 लोग भी नहीं पुरेंगे लेकिन उन्होंने पूरे मिथिला के आंदोलन का भार अपने पीठ पर उठा रखा है । हम बात भी इन्हीं क्रांतिकारीयों की बात कर रहें हैं । (more…)

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ग्लैमर और जमीनी कार्यकर्ता !

Glamour and ground workersआप थोड़े ना कुछ करते हैं हमारे लिये । वो दीदी जो आपके साथ आई थी, वह हम लोगों के लिए काम करती है । आप तो बस यूं ही इधर उधर घूमते रहते हैं । सुनकर सर चकरा गया था मेरा, तो पूछ बैठा था भाई किसकी बात कर रहे हो । (more…)

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घर में लटकते ताले !

Locks hanging in the houseलगता है मैं ही बदल गया ! नहीं – नहीं यह घर ही बदल गया । अब घर के गेट पर ताले लटके हुए मिलते हैं । पहले तो ऐसा नहीं था । तो फिर मैं सही हूँ न ! घर ही बदला मैं नहीं । सही में यह घर ही बदल गया । (more…)

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छठ का SOP

chhth vicharbindu image परेशान सा हो गई थी वो । सालों बाद छठ पर घर में सब कोई मिले थे । बातचीत करना, साथ में समय बिताना, भूले-बिसरे पल को याद करना किसे नहीं अच्छा लगता ! तो वो भी यही सब चाहती थी । (more…)

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तुष्टीकरण …!!!

tustikran image vicharbinduजब आप अपने बेटी को अच्छे स्कूल में नहीं पढाते ! बचपन से ही उसके दिमाग में यह देते हैं की पैसे कम हैं …!! तो तुम्हारा भाई ही अच्छा स्कूल में पढ़ सकता है । यह तुष्टीकरण नहीं.. (more…)

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