इर्ष्या धीमा जहर है ….


jealousyइर्ष्या ‘जलन’ एवं इस प्रकार का व्यवहार slow poison  का काम करता हैं ।, यदि आपका कोई शत्रु आपसे इर्ष्या कर रहा है, तो आप निश्चिंत हो जाएं । वह स्वयं अपने आप को मिटा रहा है । यदि आप भी इस दोष के शिकार हैं । तो इसे..तुरंत मिटा दीजिये, क्योंकि इर्ष्या रखने से आज तक के इतिहास में किसी का भला नहीं हुआ है । healthy competition  के भावना से जुड़िए ।

सभी इंसान में कोई-न-कोई खूबी होती है । आप अपने खूबी को ढूढे और उसे निखारने का प्रयास करें, पर दुसरे की सफलता देख कर इर्ष्या मत करें । सामने वाले में जो प्रतिभा है, उससे न तो ज्यादा प्रभावित होने की आवश्यकता है। और न ही अपने में हीनता का भाव ला कर ईर्ष्यालु बनने की । अपनी प्रतिभा को पहचानकर सकारात्मक सोच के जरिए उसका पूरा इस्तेमाल कीजिये । निश्चिंत रूप से आपको सफलता प्राप्त होगी

  • ‘भय’ मन की व्यर्थ उपज है, यह आत्मविश्वास को कमजोर करता है । अत: आप इस भाव को मन से निकाल दें ।
  • जो होना है सो होकर रहेगा – यह ईश्वर का विधान है, अत: भय मुक्त हो कर अपने वर्तमान को सुख-शांति से बिताएं और भविष्य का सार्थक चिंतन करें ।
  • शक अथवा वहम निराधार है – एक काल्पनिक रोग है, जो कई रोगों को आमंत्रण देता है ।
  • ऐसा बिलकुल न कहें – ‘चेहरा क्यों उतरा हुआ है’ या ‘आज बीमार से लगते हो’ ,अथवा ‘यह क्या रोग पाल रखा है ।’ ये वाक्य किसी के उत्साह को भंग करते हैं ।
  • किसी में विशेष मोह रखने से ‘भ्रम’ की उत्पति होती है: अत: मन को स्वस्थ रखें ।
  • अच्छे व बुरे विचारों की पहचान करके गलत विचारों की और से ध्यान हटाएं ।
  • संकोचपन हटाने के लिए आप उसी कार्य को पहले करें, जिसमें आपको भय लगता हो ।
  • आपके चेहरे की मुस्कान संदेश देती है – ‘आओ, मैं खुश हूँ, मुझसे बात करो ।’
  • क्रोध से बुद्धि और स्मरण शक्ति का नाश होता है, अत: जरूरी है की क्रोध पर नियंत्रण रखें ।
  • ‘इर्ष्या’ मन की दुर्बलता है, यह वयक्तित्व और स्वस्थ के लिए घातक है । जरूरी है, की आप इर्ष्याजनक व्यवहार से बचें ।
  • कुछ महान विचारकों के इर्ष्या संबंधी विचार
  • प्रायः समान विद्या वाले लोग एक-दुसरे के यश से इर्ष्या करते हैं ।

    कालिदास

  • इर्ष्या असफलता का दूसरा नाम है । इर्ष्या करने से अपना ही महत्व कम होता है ।

    चाणक्य

  • ईर्ष्यालु मनुष्य दूसरों की सुख-समृद्धि देखकर दुबला हो जाता है ।

    लेटिन लोकोक्ति

  • हत्यारे की कुल्हारी के तुलना में इर्ष्या की धार दो गुणी तेज होती है ।

    शेक्सपियर

  • इर्ष्या करने वालों का सबसे बड़ा शत्रु उसकी इर्ष्या है ।

    संत तिरुवल्लुवर

  • जिस प्रकार किट वस्त्रों को काट डालता है, उसी प्रकार इर्ष्या मनुष्य को नष्ट कर देती है ।

    संत क्रिसोस्तम

  • पूर्वी लोकोक्ति है की परोसी की मुर्गी में भी हमें हंस प्रतीत होती है ।

    मदाम डेलुजी

  • महान पुरूषों पर अधिकांश व्यक्ति भौकतें हैं, जैसे की किसी अजनबी को देख कर कुत्ते भौकतें हैं ।

    सेनेका

  • केवल इर्ष्या ही वह भावना है, जो शांत नहीं रहती, बल्कि हमेशा किसी न किसी कारन से उत्तेजित होती रहती है ।

    सेम्युअल जाँनसन

  • जैसे जंग लगने से लोहा ख़राब हो जाता है, वैसे ही इर्ष्या के कारण मनुष्य नष्ट हो जाता है ।

    यूनानी लोकोक्ति

  • शांत मन तन का जीवन है, परन्तु मन के जलने से हड्डियाँ भी जल जाती है ।

    बाइबल

  • इर्ष्या मनुष्य को ठीक उसी प्रकार खा जाती है, जिस प्रकार कपड़े को कीड़ा खा जाता है ।

    श्रीराम शर्मा आचार्य

  • इर्ष्या करने वाले मनुष्य में स्वयं कुछ बनने की महत्वाकांक्षा नहीं होती, अपितु उसकी अभिलाषा होती है कि दूसरा भी मार्गपतित होकर उसके सामने हो जाये । इसीलिए इर्ष्या को पाप माना गया है ।

    ‘चढ़ती कला’ से

  • गरीबोँ में यदि इर्ष्या है, तो स्वार्थ के लिए या पेट के लिए, जबकि बड़े आदमियों की इर्ष्या केवल आनंद के लिए है ।

    प्रेमचंद्र (गोदान)

  • इर्ष्या एक बिच्छु की भांति है जो ज्वाला से घिर गया हो । अपने आप को ही डंक मरती हुई मिट जाती है ।

    लुकमान

  • दूसरों की संपत्ति देख कर मन में इर्ष्या का भाव रखने वाले दुर्बल हो जाते हैं ।

    होरेस

  • सबकी उन्नति में ही अपनी उन्नति जान कर कभी किसी के साथ इर्ष्या न करो ।

    अथर्ववेद

  • जिसके अंदर इर्ष्या की प्रवृति जड़-मूल से नष्ट हो गयी है, वह हमेशा ही दिन हो या रात मानसिक शांति का अनुभव करेगा ।

    धम्मपद

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3 Comments

  1. keshav
    December 11, 2015
    Reply

    Superb

  2. March 2, 2016
    Reply

    Very interesting and thoughtful.

    Thanks a lot to the publisher.

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