कभी अलविदा ना कहना ! - Vichar Bindu

कभी अलविदा ना कहना !

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go to link अपने सार्वजनिक जीवन में बेहद चंचल, खिलंदड़े, शरारती और निजी जीवन में बहुत उदास, खंडित, तन्हा किशोर कुमार रूपहले परदे के सबसे रहस्यमय और सर्वाधिक विवादास्पद व्यक्तित्वों में एक रहे हैं जिनकी एक-एक अदा, जिनकी एक-एक हरकत उनके जीवन-काल में ही किंवदंती बन गईं।

बात अभिनय की हो तो वे अपने समकालीन दिलीप कुमार, राज कपूर, देवानंद, अशोक कुमार जैसे अभिनेताओं की तुलना में कहीं नहीं ठहरते, लेकिन वे ऐसे पहले अदाकार थे जिनके पास अपने समकालीन अभिनेताओं के बरक्स मानवीय भावनाओं और विडंबनाओं को अभिव्यक्त करने का कुछ अलग-सा खिलंदड़ा अंदाज़ था।

Kishore Kumar

हिंदी सिनेमा के वे ऐसे नायक थे जिन्होंने नायकत्व की स्थापित परिभाषाओं को बार-बार तोडा। वे ऐसे विदूषक थे जो जीवन की त्रासद से त्रासद परिस्थितियों और विडम्बनाओं को एक हंसते हुए बच्चे की मासूम निगाह से देख सकते थे। हाफ टिकट, चलती का नाम गाड़ी, रंगोली, दूर का राही, मनमौजी, झुमरू, दूर गगन की छांव में, पड़ोसन जैसी फिल्मों में उन्होंने अभिनय के नए अंदाज़ और नए मुहाबरों से हमें परिचित कराया।

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अभिनय से ज्यादा स्वीकार्यता और लोकप्रियता उन्हें उनके गायन से मिली। वे ऐसे गायक थे जिनकी आवाज़ में शरारत भी थी, शोख़ी भी, चुलबुलापन भी, संज़ीदगी भी, उदासीनता भी और बेपनाह दर्द भी। मोहम्मद रफ़ी के बाद वे अकेले गायक थे जिनकी आवाज़ और अदायगी की विविधता सुनने वालों को हैरत में डाल देती है। ‘ओ मेरी प्यारी बिंदु’ की शोख़ी, ‘ये दिल न होता बेचारा’ की शरारत, ‘ज़िन्दगी एक सफ़र है सुहाना’ की मस्ती, ‘ये रातें ये मौसम नदी का किनारा’ का रूमान,’चिंगारी कोई भड़के’ का वीतराग, ‘सवेरा का सूरज तुम्हारे लिए है’ की संजीदगी, ‘घुंघरू की तरह बजता ही रहा हूं मैं’ की निराशा, ‘कोई हमदम न रहा कोई सहारा न रहा’ की पीड़ा, ‘मेरे महबूब क़यामत होगी’ की हताशा, ‘मेरे नैना सावन भादो’ का विरह, ‘दुखी मन मेरे सुन मेरा कहना’ का वैराग्य – जीवन की सभी मनःस्थितियां एक ही गले में समाहित ! उनके गाए सैकड़ों गीत हमारी संगीत विरासत का अहम हिस्सा हैं।


जन्मतिथि (4 अगस्त) पर किशोर दा को भावभीनी श्रद्धांजलि ! #kishoreKumar


http://earlylearningalliance.org/calendar/2017-10-12/ आलेख : पूर्व आई० पी० एस० पदाधिकारी, कवि : ध्रुव गुप्त

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