enter site Deprecated: Function create_function() is deprecated in /home/h9fcmg5dm2qc/public_html/vicharbindu.com/wp-includes/http.php on line 311

Deprecated: Function create_function() is deprecated in /home/h9fcmg5dm2qc/public_html/vicharbindu.com/wp-includes/rest-api/class-wp-rest-request.php on line 984

Deprecated: Function create_function() is deprecated in /home/h9fcmg5dm2qc/public_html/vicharbindu.com/wp-includes/rest-api/endpoints/class-wp-rest-posts-controller.php on line 2300

Deprecated: Function create_function() is deprecated in /home/h9fcmg5dm2qc/public_html/vicharbindu.com/wp-includes/rest-api/endpoints/class-wp-rest-posts-controller.php on line 2300

Deprecated: Function create_function() is deprecated in /home/h9fcmg5dm2qc/public_html/vicharbindu.com/wp-includes/rest-api/fields/class-wp-rest-comment-meta-fields.php on line 41
महात्मा गाँधी के दर्शन / चिन्तन - Vichar Bindu

महात्मा गाँधी के दर्शन / चिन्तन

Want create site? Find Free WordPress Themes and plugins.

मोहनदास करमचंद गाँधी भारत एवं भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के एक प्रमुख अध्यात्मिक नेता थे । भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी आधुनिक भारत के महान जन-नायक समाज सुधारक और राजनितिक दार्शनिक थे । उनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 को पोरवंदर ( गुजरात ) में हुआ था ।

इन्होंने अपना व्यवसायिक जीवन 1891 में बैरिस्टर के रूप में प्रारम्भ किया । दो वर्ष के बाद एक मूकदमे के पैरवी के सिलसिले में उन्हें दक्षिण अफ्रीका जाना पड़ा । दक्षिण अफ्रीका से गाँधी जी सत्याग्रह की शक्ति आजमाने की शुरुआत किये । वे लम्बे समय तक वहीं रहे और बीच-बीच में भारत आते रहे, जहाँ लोकमान्य बालगंगाधर तिलक और गोपाल कृष्ण गोखले जैसे महान नेताओं से उनका घनिष्ठ परिचय हुआ । 1915 में जब वे भारत लौटे यहाँ उनका नाम प्रसिद्ध हो चुका था । यहाँ पर भी भारतीयों के दिन-हीन दशा पर सत्य एवं अहिंसा और सत्याग्रह के माध्यम से सविनय अवज्ञा आन्दोलन, भारत छोड़ो आंदोलन किये । गांधीजी ने सत्य और अहिंसा के सिधान्तों के आधार पर मानव को समाज के नव निर्माण की नई रह दिखाई ।

Mahatma_Gandhi

गाँधीजी के दार्शनिक सिद्धांत वे हैं जो सभी धर्मो में समान रूप से पाए जाते हैं । गाँधी  दर्शन के अन्य आधारों में सत्य और अहिंसा का भी विशेष महत्व हैं । गाँधीवादी दर्शन के प्रमुख आधारों का उल्लेख निम्न बिंदुओ के अंतर्गत किया जा सकता है ।

ईश्वर के प्रति सच्ची आस्था

गाँधी जी के जीवन और चिंतन में इश्वर तथा धर्म की सत्ता में अटूट विश्वास देखने को मिलता है । गाँधी जी का मानना था कि परमात्मा सत्य है और सत्य ही परमात्मा है । गांधीजी ने परमात्मा को सर्वोच्च व सर्वव्यापक और मानवता से सम्बन्धित माना । गाँधी जी ने विश्व को यह बताने का प्रयास किया कि इश्वर की सच्ची उपासना मानव जाति की सेवा करके ही प्राप्त की जा सकती है ।

सत्य की अवधारणा

गाँधी जी एक व्यापक सर्वशक्तिमान देवी सत्ता में विश्वास करते थे । उसी को वह इश्वर कहते थे उसी को वह सत्य मानते थे । उसी को वह प्रेम का स्वरूप समझते थे । उन्होंने कहा की में समझता हूँ इश्वर जीवन है, सत्य है, प्रकाश है, और प्रेम है ।

सत्य के रूप

सत्य गांधीजी के दर्शन और चिंतन का मुख्य आधार रहा है । मन, वचन और आचरण तीनों में सत्य को  व्यवहारिकता के साथ प्रयोग किया जाना चाहिए । गांधीजी सत्य के दो रूप बताये पहला  निरपेक्ष सत्य एवं दूसरा सापेक्ष सत्य ।

सत्य क्या है ?

इसके बारे में गाँधी जी का कथन था कि “यह एक बड़ा कठिन प्रश्न है, पर स्वयं अपने लिए मेने इसे हल कर लिया है । तुम्हारी अंतरात्मा जो कहती है वह सत्य है । शुद्ध अंतरात्मा की वाणी ही सत्य हो सकती है । उसी प्रकार शुद्ध आत्मा के निर्माण के लिए सत्य, अहिंसा, ब्रह्मचर्य, अस्तेय और अपरिग्रह के साधनों की जरूरत होती है ।”  गांधीजी के अनुसार “सत्य वह है जिसे आप इस क्षण सत्य होना मानते हैं और वही आपका इश्वर है ।”  सत्य शब्द की उत्पत्ति सत् से हुई हिया जिसका अर्थ है होना सत्य से भिन्न किसी का भी अस्तिव नहीं  है । जहाँ सत्य है वहीं ज्ञान है जो स्वयं सत्य है । जहाँ सत्य नहीं है वहाँ सच्चा ज्ञान भी नहीं हो सकता और जहाँ सच्चा ज्ञान है वही सदैव आनंद है ।

follow url Must Readविभाजन काल का मुक़म्मल दस्तावेज है – “पाकिस्तान मेल”

इस प्रकार गांधीजी ने सत्य को व्यापक अर्थ में परिभाषित करते हुए न केवल व्यक्ति के लिए इसे महत्वपूर्ण माना बल्कि राजनितिक, समाजिक और आर्थिक क्षेत्र में भी इसे लागु करने का प्रयत्न किया ।

अहिंसा की अवधारणा

अहिंसा गाँधी जी का मुख्य आधार है । गाँधी जी ने अहिंसा के मौलिक सिद्धांत को प्रतिपादित नहीं किया लेकिन इसे एक सक्रिय जीवन पद्धत्ति के रूप में अपने जीवन में उतारा । अपने जीवन के प्रयोग के साथ गाँधी जी ने अहिंसा के सामाजिक पक्ष को भी व्यावहारिक रूप दिया । इनके जीवन में अहिंसा अजेय शक्ति के रूप में व्याप्त थी ।

अहिंसा की व्याख्या

सभी जीवों के प्रति प्रेम ही गाँधी का सकारात्मक अहिंसा को परिलक्षित करता है । अत: अहिंसा कायरता ( भीरुता ) पलायनवाद नहीं है । यह प्रेम पर आधारित अजेय शास्त्र है जो व्यक्ति को निर्भिक्त्ता एवं आत्म शक्ति प्रदान करता है । अहिंसा के मार्ग का अनुसरण करने वाले व्यक्ति के लिए गांधीजी ने कुछ आचरण इंगित किये हैं । जैसे – ब्रह्मचर्य, अस्तेय, निर्भयता, कर्तव्य निष्ठा, अपरिग्रह, स्वदेश प्रेम, सहनशीलता आदि । अत: अहिंसा जीवन को सत्य के लक्ष्य की ओर ले जाने वाला साधन है ।

http://barbaragoodfriend.com/simply/qBCC-ions/io/ Must Readविनायक नरहरि भावे ( विनोबा भावे )

गाँधी जी का अहिंसा का सिद्धांत एक व्यापक दृष्टीकोण है और आत्मा की आवाज है । और प्राणी मात्र एकत्व को स्वीकार किया है । हमारे प्राचीन ग्रंथो, उपनिषदो पुराण में अहिंसा का विशेष व्याख्या है । महाभारत में अहिंसा परमो धर्म: की शिक्षा दी गई है । अहिंसा परम धर्म है । महात्मा बुद्ध और भगवान महावीर ने अपने अनुनायिओं को अहिंसा का पाठ पढ़ाया है । अहिंसा का मूल अर्थ है – ऐसा व्यवहार जिसमें हिंसा का सहारा न लिया जाय किसी जिव को पीड़ा न पहुचाई  जाए ।

गांधीजी के दृष्टि में किसी को कष्ट पहुँचाने का  विचार या किसी का बुरा चाहना भी हिंसा है । गांधीजी ने अहिंसा के सकारात्मक पक्ष पर बल दिया जो यह निर्देष देता है । कि मनुष्य को क्या करना चाहिए ।अहिंसा का सकारात्मक पक्ष है – मानव प्रेम । अहिंसा वह सिद्धांत या नीति है जिसमें अपने विरोधी को प्रेम से जीता जाता है घृणा या लड़ाई से नहीं ।


निष्कर्ष : आधुनिक यूग में महात्मा गाँधी ने सत्य और अहिंसा को भारत के स्वाधीनता आंदोलन में एक राजनीति के रूप में अपनाया और इसी शक्ति को प्रमाणित किया । समकालीन परिस्थितिओं में अहिंसा का महत्व और भी बढ़ गया है ।

anuj prsad

लेखक :  अनुज ( पटना विश्वविद्यालय के  छात्र )

anujkumarprasad05@gmail.com

Did you find apk for android? You can find new Free Android Games and apps.

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *