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तराना-ए-हिन्द के शायर मोहम्मद इक़बाल - Vichar Bindu

तराना-ए-हिन्द के शायर मोहम्मद इक़बाल

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muhammad iqbal प्रिय पाठकों प्रस्तुत है, आधुनिक उर्दू और फारसी साहित्य को एक नया मुकाम, एक नई जिन्दगी, एक नई रोशनी देने वाला कवी और ‘तराना-ए-हिन्द’ का शायर,  मोहम्मद  इक़बाल , इन्होंने कहा, “कुछ बात है की हस्ती मिटती नहीं हमारी”  इनका जन्म : 9 नवम्बर, 1877 एवं  अवसान : 21 अप्रेल  1938 हुआ । इनकी प्रमुख रचनाएँ :-  असरार-ए-खुदा, बंग-ए-दारा, तराना-ए-हिन्द ( सारे जहाँ से अच्छा ) ।

मोहम्मद इक़बाल के द्वारा लिखित देश-प्रेम से भरा यह गीत आज भी भारत में गाया जाता है । ये एक गज़ल है, जिसे इन्होंने उर्दू में लिखा था । “तराना-ए-हिन्द” 

सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्ताँ हमारा ।

हम बुलबुलें हैं इसकी, यह गुलिसताँ हमारा ।१।

ग़ुरबत में हों अगर हम, रहता है दिल वतन में ।
समझो वहीं हमें भी, दिल हो जहाँ हमारा ।२।  सारे…

परबत वो सबसे ऊँचा, हम साया आसमाँ का ।
वो संतरी हमारा, वो पासबाँ हमारा ।३।  सारे…

गोदी में खेलती हैं, उसकी हज़ारों नदियाँ ।
गुलशन है जिनके दम से, रश्क-ए-जिनाँ हमारा ।४।  सारे….

ऐ आब-ए-रूद-ए-गंगा ! वो दिन है याद तुझको ।
उतरा तेरे किनारे, जब कारवाँ हमारा ।५।  सारे…

मज़हब नहीं सिखाता, आपस में बैर रखना ।
हिन्दी हैं हम वतन हैं, हिन्दोस्ताँ हमारा ।६।  सारे…

यूनान-ओ-मिस्र-ओ-रूमा, सब मिट गए जहाँ से ।
अब तक मगर है बाक़ी, नाम-ओ-निशाँ हमारा ।७।  सारे…

कुछ बात है कि हस्ती, मिटती नहीं हमारी ।
सदियों रहा है दुश्मन, दौर-ए-ज़माँ हमारा ।८।  सारे…

‘इक़बाल’ कोई महरम, अपना नहीं जहाँ में ।
मालूम क्या किसी को, दर्द-ए-निहाँ हमारा ।९।  सारे…

मोहम्मद अलामा इक़बाल के कुछ प्रेरणात्मक विचार 
  • देश कवियों के दिल में पैदा होता है, लेकिन राजनेताओं के हाथों या तो समृध होता है या समाप्त हो जाता है ।

  • जो लोग अपनी चिंतन प्रक्रिया को नियंत्रित नहीं कर सकते, वो विचार की स्वतंत्रता उन्हें खत्म कर देती है, क्यों की यदि विचार अपरिपक्व हों, तो उनकी स्वंत्रता वक्ति को पशु बना देती है ।

  • मेरे पूर्वज ब्रह्मण थे । उन्होंने जिन्दगी खुदा के तलाश में खर्च कर दी । मैं अपनी जिन्दगी इंसान की तलाश में खर्च कर रहा हूँ ।

  • सदियों से पूरब का चिंतन और मनीषा इस सवाल का जबाब तलाशती रही की क्या ईश्वर का अस्तित्व है । मैं एक नया प्रशन पूरब को देना चाहता हूं की क्या मनुष्य का अस्तित्व है ?

  • आदर्श का रह्श्यमय स्पर्श यथार्थ को नियंत्रत किये रहता है । केवल इसी रस्ते हम आदर्श तलाश सकते है और कयाम कर सकते हैं ।

  • आओ, हम खूबसूरती से जड़ता की राह से प्रस्थान करें । आओ, हम अपने मन को जिन्दा कर दें । आओ, एक नई दिशा में प्रवेश करें । उत्सुक्तापुर्वक सितारों के पार जाकर उस सत्य को तलाशें, जिस पर खाली आँखों से विश्वास न किया जा सकें । आओ, उठे किसी बाज की तरह, जो अकेला हो कर भी लोगो के बीच रहे ।
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