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‘मुसाफिर कैफ़े’ – दिव्य प्रकाश दुबे

Analysis / समीक्षा, Book review / पुस्तक समीक्षा
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‘मुसाफिर कैफ़े’ दिव्य प्रकाश दुबे भाई कि तीसरी किताब है | यह एक छोटी सी उपन्यास है जिसे आप बड़े मजे स्टेशन के बुक स्टॉल से खरीदकर 2-३ घंटे में इस पार से उस पार तक पढ़ कर अगले स्टेशन पर बुक स्टॉल पर जमा कर सकते हैं, और फिर अगले स्टेशन तक के लिए नई किताब ले सकते हैं |

इनके लिखने का अंदाज बड़ा सहज है, बड़ा सटीक और आज के युवाओं की जुबान में लिखते हैं | और सबसे बड़ी खासियत यह है कि किरदार को उसी कि जुबान में बोलने देते हैं, उसमें अपना साहित्य नहीं बघारते हैं | इस बार लेखक ने ‘मुसाफिर कैफ़े’ में एक नया प्रयोग किया, धर्मवीर भारती साहब के ‘गुनाहों के देवता’ के प्रसिद्द किरदार चंदर, सुधा, पम्मी को अपना किरदार बनाया | ऐसे प्रयोग पहले भी हुए हैं, कई प्रसिद्द उपन्यासों के किरदारों पर सीरिज में उपन्यास लिखे गये | बहुत से छद्म नामों से भी उपन्यास लिखा गया और काफी लोकप्रिय भी रहा, अक्सर ये छद्म नाम किसी प्रसिद्ध उपन्यास के किरदारों के नाम होते थे |

‘मुसाफिर कैफ़े’ में किरदारों के नामों का प्रयोग काफी सफल रहा, लेखक ने पूरा न्याय किया है इन किरदारों के साथ | कहानी बड़ा सरल है पर जिवंत है, संवाद प्रभावी है, पाठक पर अपना एक छाप छोडती है, जैसे जैसे आप पन्ने पलटेंगे आप किरदारों को जिने लगेंगे | आपका भरपूर मनोरंजन होगा | कभी आप मुस्कुराएंगे, कभी आपमें कौतुहल होगा, कभी गुदगुदी होगी, कभी-कभी उदासी भी होगी |

कहानी अपने प्रवाह में सफ़र करती है | किताब के सभी पन्नों में यह प्रवाह एक लय में है | बीच बीच में लेखक ने ज्ञान का कुछ छौंक लगाया है जो एक पाठक को सर्वाधिक प्रभावित करता है, आप इसे जरुर अंडरलाइन करेंगे | मैंने कुछ युवाओं को ये पंच लाइन अपनी प्रेम-युद्ध में भी भांजते देखा है |

कुल मिलाकर यह किताब आजकल के भाग-दौड़ भरी जिन्दगी में दो पल वास्तविक दुनियां से अलग होकर एक काल्पनिक दुनियां में डूबकर हंसने-मुस्कुराने और भरपूर मनोरंजन के लिए पर्याप्त है |

कुछ जो खामियां लगी वो ये है कि कहानी में कोई नयापन नहीं है, बॉलीवुड की कुछ फिल्मों और अंग्रेजी-हिंदी की कुछ उपन्यासों का mesh-up रीमिक्स अगर तैयार करे तो शायद ऐसा ही होगा | कहानी में और भी स्कोप दीखता है, अंत बहुत हद तक संभावित हो जाता है | पर संवाद इतने प्रबल और मधुर हैं कि इस ओर ध्यान नहीं जाता है |

एक वाक्य में कहूँ तो ‘मुसाफिर कैफ़े’ अत्यंत मनोरंजक किताब है, मूल्य भी बहुत कम है, आप अवश्य पढ़ें |



avinash krलेखक :  अविनाश कुमार 

http://beparwah.in/


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