Ruchi Smriti vicharbindu

हमारे बुजुर्ग और उनकी अहमियत – रूचि स्मृति

Essays / आलेख, Literature / साहित्य
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संयुक्त परिवार की परिभाषा जो समाजशास्त्र में दी जाती है उस हिसाब से संयुक्त परिवार अब रह नहीं गया । परिवार में कमरे साथ वाले हैं परन्तु उसमें निवास करने वाले प्राणी गायब हैं । पर्व त्योहारो में सब का आना होता है, बातें होती हैं मस्ती होती सब फिर वापस से अपने-अपने “डेरे” पे चले जाते ।

बच्चे हमारे भविष्य हैं , इसी सोच के साथ हमारे माता-पिता हमें अपने पैरों पर खड़े होने में मदद करते हैं । समस्या यहां ये आन पड़ी है कि बच्चे सोचने लगे की उनका उनके दादा-दादी बाद में मां बाप के साथ रहना सम्भव नहीं हो सकता । वो पूराने जमाने के हैं हमारी सोच से “मैच” नहीं करते । दूर्भाग्य से दादा-दादी या माता-पिता ऐसा नहीं सोचते, अगर वो ऐसा सोच लेते तो हम जहां हैं वहां कभी नहीं पहुंच पाते । मेरी दृष्टी में असल बात ये है कि हम पूरी दुनियां को अपना असली रूप ना दिखाएं लेकिन हमारा असली रूप बड़े बुजुर्ग से छुप नहीं पाती । इसलिए हम उनकी इस शक्ति से डरते हैं ।


सच्चाई ये हैं कि एक पोती की सबसे अच्छी दोस्त उसकी दादी हीं हो सकती है , एक पोते को उसके दादाजी उसके पिता से भी अच्छे से समझ सकते हैं । सबसे बड़ी बात माता-पिता जिंदगी की आपा-धापी में अपने बच्चे को ढ़ंग से देख भी नहीं पाते हमारे बुज़ुर्गों के पास समय पर्याप्त होता है वो हमें देखते रहते हैं , हमें समझते रहते हैं , बांकी उनके पास अनुभव पर्याप्त होता है । उनके पास हमारी हर समस्या का समाधान है बशर्तें हम नई पीढ़ी उनसे चंद शब्द बात कर लें ।

मेरे दादाजी जो अब जीवित नहीं हैं लेकिन मुझे याद है जब भी मैं सर दर्द की या किसी अन्य शिकायत से सो जाया करती थी वो कुर्सी मंगवा कर मेरे सर के पास हीं बैठे रहते मैं कहती भी “दादाजी अहां जाउ हम ठीक छी” वो कहते “तोरा कहला स’ हम चैल जायब, पहले तू बिछोन छोर तखन हमहू जैब” अभी तक याद आती है उनकी ये आदत । दादी को तो मां हीं कहती हूं, रात जब तक मैं सोने जाउं चाहे वो रात के दो बजें हीं क्यूं ना हो वो नहीं सोती । हर कुछ सिखाती है, मेरे साथ खेलती भी है, ग्रंथ में उल्लेखित चीजें भी सिखाती सब कुछ । मैं उनसे कुछ छुपा हीं नहीं सकती आँखों को पढ़ जाती हैं ।

मेरा कहने का तात्पर्य यही है कि अगर हम अपने बड़ों के भविष्य हैं तो वे भी हमारी वो पुस्तक हैं , जिनकों अगर हम सही से अध्ययन कर जाते हैं तो हमारी आज की जिंदगी और आने वाला भविष्य बहुत सुंदर बीतेगा ।


लेखिका : रूचि स्मृति

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