सुख शांति के मंत्र – गौतम बुद्ध

प्रिय पाठकों प्रस्तुत है भगवान् बुद्ध के प्रेरणात्मक विचार । “दुःख के कारण तुम हो, तुम्हारे सुख के कारण तुम हो और दूसरों को दुःख देने से तुम कभी सुख न पा सकोगे । दूसरों को सताने से तुम कभी उत्सव न मना सकोगे ।”

आपके जीवन से सम्बंधित ज्ञान की बातें

प्रिय पाठकों प्रस्तुत है, विचार बिंदु का यह अंक “ज्ञान की बातें” जिसमें 100 ऐसी बातें हैं । जिसका अनुकरण करना हमारे जीवन में अतिआवश्यक है । 1 . जीवन में वो ही व्यक्ति असफल होते है, जो सोचते है पर करते नहीं ।

विलियम शेक्सपियर अंग्रेजी के कवि और नाटककार

विलियम शेक्सपियर अंग्रेजी के कवि और नाटककार थे । इनका जन्म इंग्लैंड के स्टेटफोर्ड-ऑन-इवान नामक स्थान पर 1564 में हुआ था, शेक्सपीयर में अत्यंत उच्चकोटि की सर्जनात्मक प्रतिभा थी और साथ ही उन्हें कला के नियमों का सहज ज्ञान भी था ।

एकाग्रता क्यों ? ( स्वामी विवेकानंद )

एक ब़ार स्वामीजी जयपुर में दो सप्ताह के लिए ठहरे थे । इस दौरान एक व्याकरण के विद्वान से उनकी भेंट हुई । परिचय होने के पश्चात स्वामीजी उनसे पाणिनि का अष्टाध्यायी व्याकरण पढने की इच्छा जाहिर किये । इस शास्त्र में विलक्षण पांडित्य होने पर भी पंडितजी की अध्यन प्रणाली सरल नही थी ।

मैं अपनी सुन्दरता किसकी आँखों में देखूंगी ?

यह पाउलो कोएलो की लिखी एक प्रेरक कथा है – नारसिसस एक यूवक था जो झील के किनारे अक्सर बैठा करता था । एक दिन उसने झील के पानी में अपना अक्स देख लिया । अपने सुन्दर रूप

ये वक्त यूवाओं का

उठो मित्रों दिखा दो जोश अपने दिल के लहरों का । है मांग लोगों की तेरे ही जज्बों का एक क्रांति लाने का । जुड़ी है आश सदियों से आएगी सौम्यता एक दिन । तुझे हर हाल में हो कर नया इतिहास रचना है ।

आईये सीखें वित्तीय प्रबंधन

राजा उदयन की पत्नी ने एक बौद्ध मठ को 500 चादरें दान में दी । आयुष्मान आनंद नाम का एक भिक्षु वह चादरें लेने महल में आया । जब आनंद ने चादरें लेकर जाने की अनुमति चाही तो राजा उदयन ने कहा – ‘मेरी कुछ उत्सुकता को शांत करें ।’

समस्या में समाधान ढूँढना चाहिए

एक बार एक जूता बनाने की कम्पनी ने दो यूवकों को मार्केटिंग ऑफिसर बना कर एक द्वीप पर भेजा ताकि वो वहाँ पर उस कम्पनी के बने जूते के लिए बजार की सम्भावनाएं टटोल सकें । कुछ दिनों के बाद…

पांडव का संदेश – रामधारी सिंह दिनकर

 प्रिय पाठकों प्रस्तुत है रामधारी सिंह “दिनकर” की ए रचना…….. “वर्षों तक वन में घूम-घूम, बाधा-विघ्नों को चूम-चूम, सह धूप-घाम, पानी-पत्थर, पांडव आये कुछ और निखर।
error: Content is protected !!