कवि सुमित्रानंदन पंथ

हिंदी साहित्य के छायावाद, रहस्यवाद एवं प्रगतिवादी कवि “सुमित्रानंदन पंथ” का जन्म 20 मई 1900, एवं अवसान 28 दिसम्बर 1977 को हो गया । हिंदी साहित्य की अनवरत सेवा के लिए इन्हें 1961 में पद्मभूषण 1968 में ज्ञानपीठ, साहित्य अकादमी एवं सोवियत लैंड नेहरु पुरुस्कार जैसे उच्च श्रेणी के सम्मानों से अलंकृत किया गया..

रतन टाटा एक सफ़ल उद्योगपति

उधोग एवं व्यपार के क्षेत्र में कीर्ति पताका फहराने वाले भारतीय उधोगपति  “टाटा समुह” के अध्यक्ष “रतन नवल टाटा” का जन्म 28 दिसम्बर 1937 को मुम्बई में हुआ । इन्हें उधोग एवं व्यपार के क्षेत्र में सन 2000 में पद्म भूषण तथा सन 2008 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया ।

शायर-ए-आज़म मिर्ज़ा ग़ालिब

शायर-ए-आज़म मिर्ज़ा ग़ालिब का जन्म 27 दिसंबर 1776 को आगरा में हुआ था । इनका पूरा नाम मिर्ज़ा असद-उल्लाह बेग ख़ां उर्फ “ग़ालिब” था । ये उर्दू एवं फारसी भाषा के महान शायर थे, ग़ालिब मुग़ल काल के आख़िरी शासक बहादुर शाह ज़फ़र के दरबारी कवि भी रहे थे । 1850 में बहादुर शाह जफ़र

ससुराल भी अपनी घर जैसी…..

मित्रों, आज-कल अधिकांश घरों में सास और बहु के बीच मतभेद हो जाता है । बहु के घर आने के कुछ दिन बाद से ही मतभेद बढ़ना शुरू हो जाता है, लेकिन जिस छोट-छोटी बातों से परिवार में मतभेद बढ़ता है । उसे नजरंदाज कर वो समय हम एक दुसरे को समझने में लगायें तो हमारा परिवार

लौकी, कई गुणों का ख़जाना

मित्रों लौकी एक ऐसा सब्जी है जिसमें कई गुणों का ख़जाना है । यह विभिन्न रोगों में फायदेमंद है जैसे की  गैस, कब्ज और खांसी की समस्या, किडनी डिसीज, टीबी, हार्ट डिसीज, सीने में जलन, मिर्गी, हैजा,  डायरिया, आदि रोगों में बहूत ही फयदेमन्द है ।

हेनरी फ़ोर्ड महोदय / Henry Ford

मित्रों फोर्ड मोटर के मालिक हेनरी फोर्ड दुनिया के चुनिंदा धनी व्यक्तियों में से एक थे। एक बार एक भारतीय उद्योगपति जो भारत में मोटर कारखाना लगाना चाहते थे, उससे पहले फोर्ड से सलाह लेने के लिए अमेरिका गए । उन्होंने अमेरिका पहुंच कर हेनरी फोर्ड से मिलने का समय मांगा ।  

अमरुद, कई गुणों का ख़जाना

अमरुद को सर्दियों के मौसम में बहूत सारे गुणों का ख़जाना माना जाता है । इसे खाने से रक्त में शुगर का स्तर काम होता है । अमरुद में विटामिन सी होती है यह इम्मूनिटी बढ़ाने और सर्दियों में बीमारियों से लड़ने में मददगार है ।

परिवर्तन जरूरी है….

मित्रों हमारे जीवन में बदलाव होती रहनी चाहिए और समय परिस्थिति के अनुसार हमें अपने में परिवर्तन करते रहना चाहिए । हमें हमेशा यह स्मरण रहना चाहिये कि हमारे जीवन में आने वाली सारी परस्थितियाँ हमारे ही अनुकूल हो यह आवश्यक नहीं है । इस प्रसंग के माध्यम से जाने की बदलाव क्यों आवश्यक है ।

असफ़लता की ताकत

मित्रों वाल्टर बेंजामिन एक जर्मनी यहुद्दी दार्शनिक और सांस्कृतिक आलोचक थे इनका जन्म 15  जुलाई 1892 को हुआ , इन्होंने एतिहासिक भौतिकवाद के लिए प्रभावशाली योगदान दिया । इन्होंने 48 वर्ष की अवस्था में 26 सितम्बर 1940 को आत्महत्या कर ली मरणोपरांत इनकी कृतियों ने यश जीता । असफ़लता की ताकत को इन्होंने इस प्रकार समझाया है
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