असफ़लता की ताकत


wlter benjaminमित्रों वाल्टर बेंजामिन एक जर्मनी यहुद्दी दार्शनिक और सांस्कृतिक आलोचक थे इनका जन्म 15  जुलाई 1892 को हुआ , इन्होंने एतिहासिक भौतिकवाद के लिए प्रभावशाली योगदान दिया । इन्होंने 48 वर्ष की अवस्था में 26 सितम्बर 1940 को आत्महत्या कर ली मरणोपरांत इनकी कृतियों ने यश जीता । असफ़लता की ताकत को इन्होंने इस प्रकार समझाया है ……….

जब हम असफल होते हैं तो अपने आप को तुक्ष मानने लगते है । भले ही हम सक्षम हों, मजबूत हो, असफलता हमारा मुंह चिढ़ाती है, और हम नसीब को रोने लगते है। लकिन क्या हमने कभी सफलता पर अपनी खुबियों को जानने की या अपने तक़दीर पर खुश होने की कोशिश की है ?

चाहे लोकप्रियता हो, शराब और पैसा हो या प्यार हर तबके में हमारी कुछ कुमजोरीयां होती है, और कुछ खूबियां, लकिन सफलता पर आत्ममुग्ध होना एक ऐसी खाई में कूदने के सामान है, जहां मैल और ठोकर के सिवा कुछ नहीं है । यदि हम इसी घेरे में रहते है तो हम से बड़ा मुर्ख कोई नहीं । शायद सफलता की यही सबसे बड़ी कीमत है, जो हमें चुकानी होती है, इसलिए ताकत पहचानने के लिए असफलता जरुरी है ।

                        “वाल्टर बेंजामिन”

मित्रों स्वामी विवेकानंद जी ने असफलता के विषय पर कहा है ।

 “असफलताएं कभी-कभी सफलता का आधार होती हैं । यदि हम अनेक बार भी असफ़ल होते हैं, तो कोई बात नहीं । प्रयत्न करके असफल हो जाने की अपेक्षा प्रयत्न न करना अधिक अपमानजनक है ।

शेक्सपियर का कहना था ।

 “जो लोग सचमुच बुद्धिमान हैं, वे असफलताओं से कभी नहीं घबराते ।

कनफ्यूशियस का कहना था ।

    “हमारी सबसे बड़ी शान कभी न गिरने में नहीं है, अपितु जब हम गिरें, हर बार उठने में है ।

एक अरबी लोकोक्ति है ।

“मनुष्य सफलता से कुछ नहीं सीखता, अपितु विफलता से बहूत कुछ सीखता है ।

एक अंग्रेजी लोकोक्ति है ।

  “विफलता से सफलता की शिक्षा मिलती है ।” 

साउथ कहते हैं ।

असफलता निराशा का सूत्र कभी नहीं है । अपितु यह तो नई प्रेरणा है ।

श्रीराम शर्मा आचार्य कहते  हैं ।

असफलता केवल यह सिद्ध करती है की सफलता का प्रयत्न पूरे मन से नहीं हुआ ।

 

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