लघुकथा – संगीत का ज्ञान ।

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यह बुद्ध के जीवन से सम्बंधित कहानी है । एक दोपहर को जब बुद्ध ध्यानमग्न थे । पास- पड़ोस से बहुत सारी आवाजें आ रही थीं । एक संगीतकार किसी दूसरे संगीतकार से बातचीत कर रहा था ।

एक दूसरे को बता व समझ रहा था – क्या तुम इकतारा बजाना चाहते हो – क्या ऐसा नहीं है ? यदि ऐसा है तो इकतारे के एक तार को इस ढंग से कसना सीखो कि इसका एक तार न तो बहुत कसा हो, और न ही जरूरत से ज्यादा ढीला हो । बीच का रास्ता ही एक अच्छे संगीत का उचित मार्ग है । वो वार्तालाप बंद हो गया । आवाज़ें आनी बन्द हो गईं । पर बिजली की फुर्ती से नवयुवक सिद्धार्थ के मस्तिष्क ने उस सन्देश को स्वयं में समाहित कर लिया । तात्काल सिद्धार्थ ने विश्व के समस्त दुःखों का कारण, मनुष्य द्वारा झेलने वाली समस्याओं का समाधान पा लिया । दुनियाँ के सारे लोग या तो संसार के सारे मोह माया में अत्यधिक लिप्त रहते हैं या पूरी तरह सन्यास लिए रहते हैं । या तो लोग जरूरत से ज्यादा खाते हैं या पूरी तरह भूखे रहते हैं, उपवास करते हैं । या तो वे अत्यधिक धनवान हैं या फिर पूरी तरह ग़रीब । दोनों स्थिति में वे दुःखी रहते हैं । क्योंकि उनके जीवन का तार ठीक से सधा नहीं होता है ।
 उत्तर है – मध्य मार्ग । परमशांति और संपूर्ण पवित्रता का मार्ग । किसने सोचा था कि यह परिकल्पना, यह अनुभूति  यह परम ज्ञान पूरी दुनियाँ, मानव कल्याण को बदलकर रख देगा । एक ऐसा परम ज्ञान जो एक अनपढ़, अज्ञानी संगीतकार के मुख से निकलेगा । निश्चित रूप से वह एक  महान शिक्षक था ।

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