श्री श्री रविशंकर के 21 अनमोल विचार ।

Inspirational Quotes / सुविचार
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shri shri rvishankarप्रिय पाठक विचार बिंदु के इस अंक में आप पढ़ेंगें आध्यात्म गुरु एवं आर्ट ऑफ़ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर के 21 अनमोल विचार ।

Quote 1. Love is not an emotion. It is your very existence.

प्रेम बस एक भावना  नहीं ये तुम्हारा अस्तित्व है ।  


Quote 2. You are Divine. You are part of me. I am part of you.

आप दैवीय हैं आप मेरे अंश हैं और मैं आपका अंश हूँ ।


Quote 3. Today is a gift from God – that is why it is called the present.

आज – भगवान के द्वारा दिया गया उपहार है इसीलिए लोग इसे वर्तमान कहते हैं ।


Quote 4. If you do good for people, you are doing it out of your nature.

अगर आप लोगों के लिए कुछ अच्छा करते हैं तो आप अपने nature  के विपरीत करते हैं ।


Quote 5. How far to heaven? Just open your eyes and look. You are in heaven.

स्वर्ग कितनी दूर है, अपने नेत्रों को खोलिये और देखिये आप पाएंगे कि आप स्वर्ग में ही हैं ।


Quote 6. Faith is realizing that you always get what you need.

विश्वास तुम्हे यह महसूस करवाती है कि तुम वो सब कुछ पा सकते हो जिसकी तुम्हें जरूरत है ।


Quote 7. Want is always hanging on to the I. When the I itself is dissolving, want also dissolves, disappears.

इच्छा हमेशा मैं के ऊपर रहता है, जब मैं डूबता है इच्छा भी खत्म हो जाती है ।


Quote 8. Look into the motives behind your actions. Often you don’t go for things you really want.

आप अपने क्रिया के मन्तव्य को देखिये अक्सर आप पाएंगे । जो आप नहीं करना चाहते थे वही कर बैठे ।


Quote 9. Listen to others; yet do not listen. If your mind gets stuck in their problems, not only are they miserable, but you also become miserable.”

दूसरों की सुनों; फिर से मत सुनो; अगर तुम्हारा दिमाग उनकी समस्या में अटक जाता है तो बस वही लोग दुःखी नहीं होते परन्तु तुम भी दुःखी हो जाते हो ।


Quote 10. Behind everything is your ego: I, I, I, I. But in seva there is no I, because it has to be done for someone else.

तुम्हारे हर क्रिया के पीछे तुम्हारा अहंकार है …मैं …मैं …और बस मैं ! लेकिन सेवा में मैं नहीं होता क्योंकि ये दूसरे के लिए किया जाता है ।


Quote 11. Life is nothing to be very serious about. Life is a ball in your hands to play with. Don’t hold on to the ball.

जीवन कुछ ऐसा नहीं है कि तुम गम्भीर हो जाओ; जीवन हाथ में रखे हुए गेंद की तरह है जिसके साथ खेला जाता है, उसे स्थिर नहीं रखा जा सकता ।


Quote 12. Human evolution has two steps -from being somebody to being nobody; and from being nobody to being everybody. This knowledge can bring sharing and caring throughout the world.

मानव के विकास का दो रास्ता है, एक जो कुछ होने से नहीं होना है दूसरा जो नहीं होने से सब कुछ होना है । और ये ज्ञान पुरे संसार में फैलता जाता है ।

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Quote 13. A poor man celebrates the New Year once a year.  A rich man celebrates each day.  But the richest man celebrates every moment.

एक गरीब आदमी नया साल पुरे साल में एक बार मनाता है एक धनवान आदमी उसे हर रोज मनाता है । परंतु जो सबसे धनवान है वो उसे हर क्षण मनाता है ।


Quote 14. In always wanting to be comfortable, you become lazy. In always wanting perfection, you become angry. In always wanting to be rich, you become greedy.

अगर आप हमेशा आराम को चाहेंगे तो आप आलसी हो जाते हैं आप अगर पूर्णता को चाहते हैं तो क्रोधित हो जाते हैं और अगर धनवान बनना चाहते हैं तो लालची बन जाते हैं ।


Quote 15. You have been given the highest blessing, the most precious knowledge on this planet. You are the Divine Self; you are part of the Self. Walk with that confidence. It is not arrogance. It is, again, Love.

आपको सबसे बड़ा आशिर्वाद दिया गया है । इस ग्रह के सबसे अमूल्य ज्ञान के रूप में आप खुद दिव्य हो दिव्य के अंश हो । आप इसी विश्वास के साथ चलो ये तिरस्कार नहीं है, ये प्रेम है ।


Quote 16. Want, or desire, arises when you are not happy. Have you seen this? When you are very happy then there is contentment. Contentment means no want.

इच्छा और महत्वाकांछा तब जगती है जब आप दुःखी होते हैं । क्या आपने देखा है ? जब आप खुश होते हैं तब आप सन्तोष में होते हैं । सन्तोष का मतलब होता है कोई चाहत नहीं ।


Quote 17. I tell you, deep inside you is a fountain of bliss, a fountain of joy. Deep inside your center core is truth, light, love, there is no guilt there, there is no fear there. Psychologists have never looked deep enough.

मैं कह रहा हूँ की तुम्हारे अंदर आनंद का फव्वारा है, खुशियों का फव्वारा है, तुम्हारे अंदर केंद्र में सत्य, प्रकाश, और प्रेम बसते हैं । वहाँ कोई अपराध बोध नहीं है, वहाँ कोई डर नहीं है …मनोवैज्ञानिक कभी अन्तर्मन को नहीं देखते ।


Quote 18. When you share your misery, it will not diminish. When you fail to share your joy, it diminishes. Share your problems only with the Divine, not with anyone else, as that will only increase the problems. Share your joy with everyone.

जब आप अपनी कृपणता को बाँटते हैं तब भी वो नहीं घटता, लेकिन जब आप अपनी खुशियों को बाँटने से पीछे रह जाते है तो वह घट जाता है, आप अपनी समस्या को परमात्मा से share करें किसी और से नहीं । क्योंकि इससे आपकी समस्या बढ़ जायेगी । परन्तु खुशियों को सब के साथ बाँटें ।


Quote 19. Wise is the one who learns from another´s mistakes. Less wise is the one who learns only from his own mistakes. The fool keeps making the same mistakes again and again and never learns from them.

बुद्धिमान वो है जो दूसरों के गलतियों से सीखता है । कम बुद्धिमान वो है जो केवल अपनी गलतियों से सीखता है । मुर्ख वो है जो समान गलती बार-बार दोहराता है, और कभी नहीं सीखता है ।


Quote 20. Knowledge is a burden if it robs you of innocence.Knowledge is a burden if it is not integrated into life.Knowledge is a burden if it doesn’t bring joy.Knowledge is a burden if it gives you an idea that you are wise.Knowledge is a burden if it doesn’t set you free.Knowledge is a burden if it makes you feel you are special.

ज्ञान एक बोझ है अगर ये तुम्हारे मासूमियत को लूटता है, अगर ये तुम्हारे जीवन में सम्मलित नहीं है, अगर ये तुम्हें ख़ुशी नहीं देता, अगर ये तुम्हें विचार देता है कि तुम बुद्धिवान हो, अगर ये तुम्हें मुक्त नहीं करता है और अगर ये तुम्हें महसूस करवाता है कि तुम विशेष हो ।


Quote 21. By self-study, by observing, by being hollow and empty, you become a channel – you become a part of the Divine. You are able to feel the presence of the Divinity. All the different angels and devas, all these different forms of our consciousness, start blossoming.

आत्ममंथन के द्वारा परीक्षण के द्वारा और रिक्त हो जाने के द्वारा आप एक माध्यम बन जाते हैं आप दैवीय अंश हो जाते हैं । आप दैविक उपस्थिति को महसूस करने के काबिल बन जाते हैं । सभी तरह के दृष्टिकोणों से चेतना के विभिन्न प्रारूपों से आप प्रफुल्लित होने लगते हैं ।


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जय हिन्द !

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