शहर को भी खूबसूरत, गाँव के लोग ही बनाते हैं !


gaanw

शहर में कोलाहल बढ़ गयी है और गर्मी भी। ये लोगों को तंग कर रही है । रात से ज्यादे दिन सुनसान हो रहे हैं । लोग स्विचों की हवा चाह रहे हैं । बन्द कमरे भर रहना चाह रहे हैं ।

वहीं दूसरी तरफ गाँव अपनी खूबसूरती के चरम पर है । गाँव में अबतक वसंत जिंदा है । सुबह की हवा आज भी हल्की ठंडक औऱ रात की हवा आज भी प्यारी नींद दे रही है । किसी तालाब से आता पानी वाला हवा, किसी पानी की बूंदों सा शरीर पर बिछ जाता है । हवा अभी भी खूब चल रही है । गर्मी कितनी भी बढ़ जाये, पेड़ो की छांव सबको मीटा देती हैं । खेत के फसल अब दरवाजे को आ रहे हैं। अनाज को समेट कर कोठलियों में भरा जा रहा है । ये कोठलियाँ अब बेहद कम दिखती हैं मगर जहाँ भी दिखती हैं, पुरानी यादें ताज़ा करती हैं । और शहर से आया व्यक्ति, एक तस्वीर लेने से नहीं चूकता । दरवाजे के पुआल पर बच्चे शाम को लोटते-खेलते हैं और गाँव के बचपन को खूबसूरती से जीते हैं । गाँव को बचपन और मिटते अस्तित्व को बचाने की जिम्मेदारी है । लुप्त होती जा रही खूबसूरत और फायदेमंद, कम खर्चीले वस्तुओं को संभालना होगा ।

Must Readक्योंकि हमारे भीतर का बच्चा कहता है कि “सब मनोरथ बाबा के भरोसे”

gaanw

अभी गाँव में आमों का मौसम है । धान के बीज खेतों में रोपे जा रहे हैं । गेहूँ कटा के बथान पर आ चुका है । भुस्सा हरेक दरवाजे पर पड़ा हुआ है । बारीश बीच-बीच में होती है, कभी खुले में पड़े अनाज को भींगा-सराती है तो कभी पेड़ो से आम गिराती है । आज भी गाँव की बच्चे टिकुला के लिये लपक पड़ते हैं, जब भी तेज हवा उठती है । जगह-जगह मचान बनाये जा रहे हैं अब । लेकिन अब न तोड़ने वाले लोग हैं, न गाछी के मालिक । रखबार जी आते हैं, लगाते और तोड़ते हैं । पोखर का पानी और जलकुंभी हरा हो गया है ।

इस मौसम में कई त्योहार, गर्मी छुट्टी हो रहे हैं । शहर से लोग लौटेंगे और तो गाँव का मन भी हरियायेगा । शहर को भी खूबसूरत, गाँव के लोग ही बनाते हैं । नहीं तो शहर भी खण्डहर सा होता । यदि कहीं शांति है तो इधर ही है । सच तो यही है कि भारत के प्राण, गाँव में ही बसते हैं ।


आलेख : सागर 

Previous मार्क्स के आधारभूत सिद्धांत का समर्थक हूँ, समर्थकों का समर्थक नहीं !
Next तलत महमूद ; दिले नादां तुझे हुआ क्या है !

No Comment

Leave a reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *