माटी को निर्जलीकरण हो गया है


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अभी जहानाबाद गया था, जल विहीन है पूरा क्षेत्र | गर्द का गुबार उठता है हल्की सी हवा चलने भर से | परती खेत धूप में जल रहा है | ये स्थिति नवादा, जमुई जैसे कई अन्य क्षेत्रो में भी हो रहा है |

पानी की समस्या अगले १० वर्ष में सबसे बड़ी समस्या बनने वाली है | बिहार में ये समस्या प्रलयकारी रूप ले रही है | एक चौथाई क्षेत्र सूखे की चपेट में आ रहा है, कई क्षेत्रो में पानी में आर्सेनिक की समस्या भी सुनने को आया है, शोध निरंतर चल रहा है, कई क्षेत्रों में पानी में लौह की प्रचुरता देखी जा रही है, पूर्णिया-कटिहार तरफ तो उजले दांत से कपड़े तक पीले हो जा रहे हैं |

सवाल ये है कि इसका समाधान क्या है ? क्या हर घर जल योजना के तहत टोंटी लगा दिया गया है मात्र उससे पानी की बर्बादी कम हो जाएगा ??

शायद समाधान ये है कि जल संरक्षण किया जाय, भूजल पुनर्भरण किया जाय | हमारे बिहार में तकनीक की सुलभता उतनी नहीं है ना ही उतना जागरूकता है | एक-आध फीसदी किसानों को छोड़कर बाकी सभी बाढ़ सिंचाई (flood irrigation) ही करते हैं और अक्सर फसल को उतना पानी का जरुरत नहीं होता है और पानी बर्बाद चला जाता है | जरुरत ड्रिप, स्प्रिंकलर, रेन गन जैसे तकनीक का है, इससे तकरीबन 30-40% पानी का खपत कम किया जा सकता है |

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हर कोई अपने आलय में अगर एक सोख्ता बना लें या कोई पुराना कुआँ हो तो उसका भी उपयोग किया जा सकता है और छत या आँगन से निकलने वाले बर्षा जल को पाइप या नाले के सहारे उस सोख्ता में जमा करने लगें तो शायद इस तरह काफी मात्रा में बर्षा जल से भूजल संभरण किया जा सकता है ।

तालाबों का प्रचलन तो खत्म ही हो रहा है, लोग धड़ल्ले से तालाबों, गड्ढों को भरकर उसपर मकान बना रहे हैं या जो कुछ तालाब है भी अधिकांशतः अतिक्रमित है । नहरों और तालाबों का जल संरक्षण में बड़ा योगदान होता है । कई सूखाग्रस्त क्षेत्रों में तालाब के बीच 2-3 गहरा गढ्ढा खोद कर रख दिया जाता है जिसका मुख्य उद्देश्य भूजल संभरण ही होता है ।

मेरा घर बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में है, प्रत्येक साल बाढ़ आता है और लाखों क्यूसेक पानी बेकार जाता है । आप लोगों के पास कुछ आईडिया है तो बताइये, इस पानी की समस्या का कुछ किया जाय ।

लेखक : अविनाश कुमार 

 

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