मेरे भीतर का “बुद्ध”

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बुद्ध पूर्णिमा था और संयोग से कुशीनगर से गुजर रहे थे । इसी दिन गौतम बुद्ध कुशीनगर में महानिर्वाण प्राप्त किये थे । वहाँ मेला लगा हुआ था पर फिर भी हर जगह शांति थी । ज्यादा देर रहना नहीं हुआ पर आगे के पूरे रास्ते बुद्ध के बारे में सोचता आया ।

वैसे बौद्ध धर्मावलम्बी अब बुद्ध को भगवान मानने लगे हैं और हिन्दू भी उन्हें विष्णु का अवतार कहते हैं, पर बुद्ध ने हमेशा किसी भगवान के पूजा के स्थान पे सेल्फ इनक्लीनैशन की बात की । मैं Pantheist हूँ और इस नाते भी बुद्ध और उनकी शिक्षा हमको सबसे रिलेटिव मॉडर्न और कंटेम्प्रोरी लगती है ।

बुद्धिज़्म कोई धर्म नही है बस एक वेय ऑफ लाइफ है जो खुद के अंदर के दोषों को दूर करने, दया-प्यार-अहिंसा आधारित जिंदगी जीने, दूसरों को समझने-स्वीकार करने, खुद को खोजने और शांति में ही ईश्वर की बात करता है । सेल्फ कंट्रोल, सेल्फ-इनक्लीनैशन, मैडिटेशन, टॉलरेंस, शांति, प्यार, अहिंसा, विज्ञान, क्वेश्चनिंग आदि बुद्धिज़्म को एक ऐसा व्यापक रूप देता है जिसका पालन हम सब करते हैं किसी न किसी न रूप में ।

Aditya Jha

टाइम मैगजीन ने 2000 ईस्वी में एक लिस्ट बनाई थी “हंड्रेड पीपल हु चेंज्ड द वर्ल्ड” जिसमें उसने बुद्ध को चौथा  स्थान दिया था मानव इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण व्यक्तियों के लिस्ट में । आप स्वयं सोचिये की 2500 साल पहले इस तरह की मॉडर्न और नई सोच देना बुद्ध के जीनियस और पूजनीय होने का स्वयं प्रमाण है । आज भले ही आपको ये जेनरल लगे पर युद्धों और राज्य निर्माण के उस दौर में अहिंसा-दया की बात करना, ऐसे समाज की बात करना जहां कोई जाति-वर्ग-ऊंच-नीच न हो, विज्ञान-मेडिटेशन-सवाल-शिक्षा-मध्यम मार्ग, सब धर्मों के प्रति आदर की बात करना एक आश्चर्य है ।

बौद्ध धर्म इतना सरल है की आप स्वत: अपने भीतर के बुद्ध को देख लेंगे । कुछ दिन पहले दलाई लामा ने कहा था की यदि विज्ञान और बौद्ध धर्म किसी बात पर विपरीत राय दे तो आप विज्ञान के साथ जाएं, ये आधुनिकता है बौद्ध धर्म की ।

खैर, बुद्ध पूर्णिमा ही वो दिन है जिसपर बुद्ध का जन्म, ज्ञानप्राप्ति और महानिर्वाण तीनो हुआ था । कुशीनगर से निकलते वक्त मेरे भीतर के बुद्ध मुस्कुरा रहे थे ।

बुद्धम शरणम गच्छामि


लेखक : आदित्य झा

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