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साहित्य


ramdhari singh dinkar 2

प्रिय पाठकों प्रस्तुत है रामधारी सिंह “दिनकर” की प्रसिद्ध रचना…….. “वर्षों तक वन में घूम-घूम, बाधा-विघ्नों को चूम-चूम, सह धूप-घाम, पानी-पत्थर, पांडव आये कुछ और निखर।

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babak sanskar

श्री हरिमोहन झा की रचना जो मैथली में है । ( बाबाक संस्कार ) मैथली साहित्य की अत्यंत प्रचलित रचना है । जिसमें समाज का वास्तविक स्वरूप को प्रतिबिम्बित कर व्यंग किया गया है । पढिये इस कथा का हिंदी अनुवाद !

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vidyapati

मैथली कवि कोकिल विद्यापति ठाकुर का जन्म 1360 ई० में बिहार के मधुबनी जिला के बिसपी ग्राम में हुआ । श्रृंगार और भक्ति रस के कविता के बीच संतुलन स्थापित करने वाले विद्यापति एक महान रचनाकार थे । इन्हें अनेक उपाधि प्राप्त है । जैसे –

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मित्रों प्रस्तुत है, दुष्यंत कुमार की लोकप्रिय प्रेरणात्मक कविताएँ ……… ” हो गई है पीर- पर्वत सी । कुछ भी बन बस , कायर मत बन । और ये जो शहतीर है ।“  “सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं,                                 …

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Rose Vicharbindu

प्रिय पाठकों प्रस्तुत है, दुनियां के मशहुर शायरों की प्रेरणात्मक शायरियाँ …जिनमें मिर्ज़ा ग़ालिब, मोहम्मद इक़बाल, अकबर इलाहाबादी, मुनव्वर राणा, बशीर बद्र, अहमद फ़राज, जौहर, अख्तर अंसारी, बहज़ाद लखनवी, फ़िराक, गुलज़ार…इत्यादि शायरों की शायरियाँ….

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subhash chandra bose

प्रस्तुत है, महान स्वतंत्रता सेनानी,  जिनका नाम इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है, जय हिन्द के घोष करने वाले, ऐसे महापुरुष नेताजी सुभाषचंद्र बोस से संबंधित एक कविता । 

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kabir dash

मानव जीवन के वास्तविकताओं से पूर्ण संत कबीरदास जी के दोहे और उसका अनुवाद . हिंदी साहित्य में अपना विशिष्ट स्थान रखने वाले कबीरदास जी मानव जीवन के रहस्यों को आसानी से दोहे के माध्यम से समझा देते हैं.

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Sumitranandan Pant

हिंदी साहित्य के छायावाद, रहस्यवाद एवं प्रगतिवादी कवि “सुमित्रानंदन पंथ” का जन्म 20 मई 1900, एवं अवसान 28 दिसम्बर 1977 को हो गया । हिंदी साहित्य की अनवरत सेवा के लिए इन्हें 1961 में पद्मभूषण 1968 में ज्ञानपीठ, साहित्य अकादमी एवं सोवियत लैंड नेहरु पुरुस्कार जैसे उच्च श्रेणी के सम्मानों से अलंकृत किया गया..

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mirza ghalib

शायर-ए-आज़म मिर्ज़ा ग़ालिब का जन्म 27 दिसंबर 1776 को आगरा में हुआ था । इनका पूरा नाम मिर्ज़ा असद-उल्लाह बेग ख़ां उर्फ “ग़ालिब” था । ये उर्दू एवं फारसी भाषा के महान शायर थे, ग़ालिब मुग़ल काल के आख़िरी शासक बहादुर शाह ज़फ़र के दरबारी कवि भी रहे थे । 1850 में बहादुर शाह जफ़र …

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