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कविता


gunjan shree

कुछेक वर्ष पहले मेरे जन्मदिवस पे मेरे पिता ने मुझे इस जीवनोपयोगी कविता से उपहृत किया था। मैं न्यूनाधिक्य मूढ़ पता नहीं कितना कसूँगा इस के कसौटी पर…

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ramdhari singh dinkar

रामधारी सिंह दिनकर का जन्म : 23 सितम्बर 1908 को बिहार के मुंगेर जिला के सिमरिया में हुआ था । दिनकर जी वीर रस के सर्वश्रेष्ठ कवि के रूप में प्रख्यात हुए । इन्हें पद्मभूषण, साहित्य अकादमी तथा भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से नवाजा गया । आईये पढ़ें इनके काव्य “कुरुक्षेत्र” का कुछ अंश जिसमें इन्होंने युद्ध को क्रूर …

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Jhansi Ki Rani

भारतीय स्वंत्रता संग्राम के इतिहास की वीरांगना “झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई” जो 23 वर्ष की अवस्था में ही ब्रिटिश सैनिकों से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हो गई. आईये पढ़ते हैं सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता  “झाँसी की रानी” 

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विचारबिन्दु.कॉम  के इस अंक में आप पढ़ेंगे उभरते हुए यूवा कवि आदित्य झा की मार्मिक रचना “विरह” बिन उम्मीद चले-चलते हैं । और तुम तूफान समझ पाते गर । 

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ramdhari singh dinkar 2

प्रिय पाठकों प्रस्तुत है रामधारी सिंह “दिनकर” की प्रसिद्ध रचना…….. “वर्षों तक वन में घूम-घूम, बाधा-विघ्नों को चूम-चूम, सह धूप-घाम, पानी-पत्थर, पांडव आये कुछ और निखर।

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subhash chandra bose

प्रस्तुत है, महान स्वतंत्रता सेनानी,  जिनका नाम इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है, जय हिन्द के घोष करने वाले, ऐसे महापुरुष नेताजी सुभाषचंद्र बोस से संबंधित एक कविता । 

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kabir dash

मानव जीवन के वास्तविकताओं से पूर्ण संत कबीरदास जी के दोहे और उसका अनुवाद . हिंदी साहित्य में अपना विशिष्ट स्थान रखने वाले कबीरदास जी मानव जीवन के रहस्यों को आसानी से दोहे के माध्यम से समझा देते हैं.

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Sumitranandan Pant

हिंदी साहित्य के छायावाद, रहस्यवाद एवं प्रगतिवादी कवि “सुमित्रानंदन पंथ” का जन्म 20 मई 1900, एवं अवसान 28 दिसम्बर 1977 को हो गया । हिंदी साहित्य की अनवरत सेवा के लिए इन्हें 1961 में पद्मभूषण 1968 में ज्ञानपीठ, साहित्य अकादमी एवं सोवियत लैंड नेहरु पुरुस्कार जैसे उच्च श्रेणी के सम्मानों से अलंकृत किया गया..

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mirza ghalib

शायर-ए-आज़म मिर्ज़ा ग़ालिब का जन्म 27 दिसंबर 1776 को आगरा में हुआ था । इनका पूरा नाम मिर्ज़ा असद-उल्लाह बेग ख़ां उर्फ “ग़ालिब” था । ये उर्दू एवं फारसी भाषा के महान शायर थे, ग़ालिब मुग़ल काल के आख़िरी शासक बहादुर शाह ज़फ़र के दरबारी कवि भी रहे थे । 1850 में बहादुर शाह जफ़र …

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