Posts in category

समाज


map of mithila

मिथिला आंदोलन मुट्ठी भर लोगों का समूह बन कर रह गया है. अगर आप गिनती करें तो 100 लोग भी नहीं पुरेंगे लेकिन उन्होंने पूरे मिथिला के आंदोलन का भार अपने पीठ पर उठा रखा है. हम बात भी इन्हीं क्रांतिकारीयों की बात कर रहें हैं.

0 8
Avinash Bharadwaj

आप थोड़े ना कुछ करते हैं हमारे लिये. वो दीदी जो आपके साथ आई थी, वह हम लोगों के लिए काम करती है. आप तो बस यूं ही इधर उधर घूमते रहते हैं. सुनकर सर चकरा गया था मेरा, तो पूछ बैठा था भाई किसकी बात कर रहे हो.

2 45
ghr me ltakte taale

लगता है मैं ही बदल गया ! नहीं – नहीं यह घर ही बदल गया । अब घर के गेट पर ताले लटके हुए मिलते हैं । पहले तो ऐसा नहीं था । तो फिर मैं सही हूँ न ! घर ही बदला मैं नहीं । सही में यह घर ही बदल गया ।

0 26
image of tustikran for girl child

जब आप अपने बेटी को अच्छे स्कूल में नहीं पढाते ! बचपन से ही उसके दिमाग में यह देते हैं की पैसे कम हैं …!! तो तुम्हारा भाई ही अच्छा स्कूल में पढ़ सकता है. यह तुष्टीकरण नहीं..

0 7
Panchayat

छठ के अगले ही दिन आप देखियेगा मिथिला के हर दलान पर फिर पंचायत बैठेगी । मुद्दा वही भाई-भाई के बीच जमीन जायदाद का बंटबारा, धुर कट्ठा जमीन के लिये पंचायती, गाली गलोज से लेकर मारपीट तक !

0 18
image social work

समय बदल गया, जमाना बदल गया. आर्थिक उदारीकरण की नीति अपनाने के 25 साल बाद एक नए मिडिल क्लास का उदभव  इस देश में हुआ.

0 12
kirti jha aazad

इस DDCA के लड़ाई में मिथिला का विकास कहीं किसी कोने में दुबक कर रह गया । अरे आपको लड़ना ही था तो मिथिला के बंद पड़े चीनी मील के लिए लड़ते,

0 29
avinash bharadwaj

आप धर्म के नाम विरोध करतें हैं किसी का ! ठीक है हमें कोई दिक्कत नहीं । हमें दिक्कत उन से है जो पीछे बैठे चुपचाप तमाशा देखते हैं और कुछ बोलते नहीं । जी हाँ हम उन्हें कसुरवार मानते हैं जो इसके खिलाफ खड़े नहीं होते, इसका का विरोध नहीं करते, और इस असमानता के खिलाफ …

0 78
avinash

बातचीत की शुरूआत मैंने ही की थी । सप्ताह भर का साथ, हमेशा मुस्कुराता हुआ चेहरा और मेरे चुहलपन ने एक नाता सा जोड़ दिया था । दोपहर में फुर्सत के क्षण में साथ बैठे तो मेरे मन में यूँ ही..

2 11
image of law

हमें पता है, साथी तुम्हें न्याय नहीं मिलेगा. लेकिन हम मजबूर जो ठहरे, हर जुल्म के टक्कर में खड़ा होने की एक आदत सी जो हो गई है. हम भी क्या करें !

1 53