नव वर्ष पर कविता


“नव वर्ष”

नव्’ वर्ष का आगमन
हुआ शरद के संग…
स्वागत्’ में था खड़ा
ठंढ’ अति प्रचंड .. ।

नव’ वर्ष… मनाने का
मन में था ऐसा उमंग
हमसब सोचें नए वर्ष में
बदलें अपना ढंग ….।

करें व्यवस्थित खुद को
स्फुरित रहे अंग-प्रत्यंग ।

करें नियामित’ खुद को
लक्ष्य रहे हर पल् ज्वलंत ।

हो चिंतन’ स्पष्ट सदा
चलें सतत् निष्ठा’ के संग ।

ऐसा ही सोचा है.. हमने
नव् वर्ष मनाने का यह ढंग ।।

© रजनिश प्रियदर्शी

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