नया लेख

उम्र के आखिरी पड़ाव पर राधा और कृष्ण के मिलन का आख्यान ! लेखक ; पूर्व आई० पी० एस० पदाधिकारी, कवि : ध्रुव गुप्त

गाँव छोड़ने के बाद चित्त उद्विग्न है। गाँव में बाल सखा किशुन से मुलाकात हुई। पूछा कि आजकल क्या कर रहे हो तो जबाब दिया की इज्जत बचा कर दो वक्त की रोटी कमा रहा हूँ। तुम लोगों ने गाँव छोड़ दिया कभी खोज खबर भी नहीं लेते। किसी न किसी को तो गाँव में …

जब आपके अनुयायी पिछले दस सालोँ में जे.एन.यू मे दलितोँ के उत्थान, गरीबोँ को न्याय इत्यादि पर सेमिनार आयोजित कर रहे थे, तो भारत के निम्न मध्यम वर्गीय परिवार का दो यूवक फ्लिपकार्ट बनाने में जुटे थे.

साहित्य

साहित्यिक गतिविधियाँ तथा पुस्तक चर्चा
Atal Bihari Vajpayee

अटल जी कहते थे, “मेरी कविता जंग का एलान है, यह पराजय की प्रस्तावना नहीं | वह हारे हुए सिपाही का नैराश्य-निनाद नहीं, जूझते यौद्धा का जय संकल्प है, वह निराशा का स्वर नहीं, आत्मविश्वास का जयघोष है |”

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sailing-boat

मैं नाव के अगले माईन पर बैठा था और मेरी नजरें जलकुंभी के फूलों पर टिकी थी जो धीरे-धीरे मेरे पास आती जा रही थी । करमी के फूलों की पृष्ठभूमि में उसकी खूबसूरती और बढ़ गई थी।

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आज का विचार

चार झा जी मिल के एक वैबसाइट पर हैं, वो कम है क्या!

— खट्टर काका, भरकुस्सा पुर