नया लेख

प्रिय पाठकों प्रस्तुत है विश्वपर्यावरण दिवस पर चर्चित युवा साहित्यकार “विकास वत्सनाभ” जी का आलेख “विश्व पर्यावरण दिवस और बारूद की ढ़ेर पर सिगरेट सुलगाता जेनरेशन“

प्रिय पाठकों विचार-बिंदु के इस अंक में प्रस्तुत है । विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेषांक युवा साहित्यकार सुमित मिश्र ‘गुंजन’ द्वारा रचित लघुकथा “पीपल की आत्मकथा” 

कवि मैथिलीशरण गुप्त की कुछ प्रेरणात्मक कविताएँ/ कालजयी रचना जो हमें प्रेरणा देता है । आईये पढ़ें कविता ( “नर हो, न निराश करो मन को” एवं “मनुष्यता” ) 

साहित्य

साहित्यिक गतिविधियाँ तथा पुस्तक चर्चा
Atal Bihari Vajpayee

अटल जी कहते थे, “मेरी कविता जंग का एलान है, यह पराजय की प्रस्तावना नहीं | वह हारे हुए सिपाही का नैराश्य-निनाद नहीं, जूझते यौद्धा का जय संकल्प है, वह निराशा का स्वर नहीं, आत्मविश्वास का जयघोष है |”

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sailing-boat

मैं नाव के अगले माईन पर बैठा था और मेरी नजरें जलकुंभी के फूलों पर टिकी थी जो धीरे-धीरे मेरे पास आती जा रही थी । करमी के फूलों की पृष्ठभूमि में उसकी खूबसूरती और बढ़ गई थी।

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