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गाँव-घर


image of holi

सामाजिकता का चलन ख़त्म होने के साथ हमारी उम्र के लोगों के लिए होली अब स्मृतियों और पुराने फिल्मी गीतों में ही बची रह गई है. आज भोले बाबा की बूटी का प्रसाद ग्रहण कर यूट्यूब पर अपने मनपसंद पुराने होली गीत सुन रहा था कि गांव में बीती बचपन की कई होलियां याद आ …

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khalihan-se-live

भरत आज भरथा से भरत भाई हो गए हैं । आज आप इनके गांव जाओ और किसी को पूछो कि भरत जी का घर कहाँ है तो लोग आपको इनके घर तक पहुँचा देंगे, पर चलते-चलते जरूर पूछ देंगे कि कोनों कंपनी से आये हैं का ? बहुते कंपनी वाला सब उनके पास आते रहता …

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khet khilahan

आज सुबह से ही मौसम काफ़ी अच्छा था, घर से ऑफिस के लिए अभी निकला ही था कि बारिश शुरू हो गयी, सामने एक मकान था तो फटफटिया खड़ा कर छज्जे के नीचें शरण लिया, काफ़ी देर तक 

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gaam-ghar

जहाँ आज की युवा पीढ़ी गाँव को हेट करने लगी हैं वहीं कुछ युवा गाँव से जुड़ी बातें, यादें एवं सपनो को कलम से सजा कर पेश करते रहते हैं तो आईये पढ़ते है सागर झा के कलम से निकला यह आलेख “गाँव से इतना इरिटेसन क्यों ?”

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aarkestra aur taak jhaank

स्टेज सज ही रहा था, साउंड बॉक्स लाइट और म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट लगाया जा रहा था, स्टेज के आगे युवाओं की भीड़ जमने शुरू हो गए थे. कुछ लोग इधर उधर टहल रहे थे.

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Panchayat

छठ के अगले ही दिन आप देखियेगा मिथिला के हर दलान पर फिर पंचायत बैठेगी । मुद्दा वही भाई-भाई के बीच जमीन जायदाद का बंटबारा, धुर कट्ठा जमीन के लिये पंचायती, गाली गलोज से लेकर मारपीट तक !

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image of Anganwadi

आंगनबाड़ी हर गाँव क़स्बा मोहल्ला की एक पहचान है. छोटे-छोटे बच्चो का समूह, खिचरी बनाती सहयोगिनी और नन्हे-मुन्ने के किलकारियों से गूंजता वह

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