हो जाएं सचेत ! लगातार बढ़ रहा है ‘जुवेनाइल क्राइम’


juvenile crime 2

वैसे तो हिंसा हमारी प्रवृति में शामिल हो गयी है और ये एक वैश्विक समस्या के रूप में उभर रहा है । चाहे रेयन इंटरनेशनल स्कूल में 16 वर्ष के बच्चे की हत्या हो या हरियाणा में 18 वर्ष के बच्चे द्वारा स्कूल प्रिंसिपल की हत्या या फिर सहरसा में लगातार हो रही हिंसा, युवाओं की संलिप्तता लगातार बढ़ रही है। ये हमारे समाज के लिए एक अलार्मिंग सिचुएशन है और इसपर समय रहते काबू पाना होगा। यहाँ बिंदुवार कुछ कारणों को मैं इंगित करना चाहूँगा 

पारिवारिक पक्ष

कहते हैं ,परिवार हमारा पहला स्कूल होता है, जहाँ हमारे व्यक्तित्व का पूर्ण विकास होता है । यहीं से हमारी अच्छे – बुरे की समझ बनती है । अभिभावक का व्यवहार बच्चों के मन मस्तिष्क को प्रभावित करता है । माता-पिता के बीच आपसी समझदारी, उनके द्वारा घर के बुजुर्ग के प्रति व्यवहार, उनका सामाजिक सरोकार, बड़े भाई-बहन का प्यार ये सब कुछ ऐसे पहलु हैं, जो बढ़ती उम्र में बच्चे के व्यक्तित्व विकास को प्रभावित करती है ।

घर में यदि दो या ज्यादे बच्चे हैं तो निश्चित ही सब एक दूसरे से अलग हैं और सबों के लिए अलग-अलग ट्रीटमेंट की जरूरत होती है, लेकिन कभी कभी इसके कारण बच्चे के भीतर डिस्क्रिमिनेशन की भावना जग जाती है और वो ख़ुद हीन भावना से ग्रसित हो जाते हैं ।

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प्रायः देखा गया है कि जिन माता-पिता के बीच कलह ज्यादे होती है उनके बच्चे शुरू मेंज्यादे एकांत रहना पसंद करने लगते हैं और धीरे-धीरे नशे और गलत संगति में फंस जाते हैं, जहाँ से निकलना उनके लिए दूभर हो जाता है ।


मनोवैज्ञानिक पक्ष

पढाई का बोझ और परिवार की अपेक्षाएं बच्चे को दबाव में रखता है । अच्छे अंक लाने के लिए हम उन्हें पुरे दिन स्कूल, ट्यूशन और किताबों के बीच घेरकर रखना चाहते हैं और अनजाने में ही हम उनसे उनका बचपना छीन रहे होते हैं । कई बच्चे पढ़ाई के अलावे अपने रूचि का काम करना चाहते हैं और हम करने नहीं देते हैं तो वो हिंसक होते चले जाते हैं ।

टीनएजर्स को ग्लैमर आकर्षित करता है । इनकी जान पहचान यदि गांव या शहर के छूटभैये बदमाश या नेता से हो जाती है तो उन्हें लगता है कि अब वो ज्यादे शक्तिशाली है ,और अब वो कुछ भी करेंगे तो उन्हें ये नेता आश्रय देगा ।


सामाजिक पक्ष

स्कूल या कॉलेज में अलग-अलग आर्थिक बैकग्राउंड के बच्चे पढ़ते हैं, स्वाभाविक है मित्रता उन्ही के बीच होनी है । ऐसे स्थिति में कई बार बच्चे अपने अमीर दोस्तों की नकल करने लगते हैं और कुछ असामान्य माँग कर बैठते हैं ( जैसे,अपने घर की आर्थिक तंगी के बावजूद बाइक, महंगा स्मार्ट फ़ोन, महंगा कपड़ा आदि) और अभिभावक उन्हें समझाने के बदले उनकी माँग पूरी कर देते हैं और फिर अपने आर्थिक क्षमता से ज्यादे चीजों के उपभोग की आदत लग जाती है । अब स्थिति ऐसी आ जाती है कि यदि घरवाले उन मांगों को पूरा नहीं करेंगे तो वो चोरी या अन्य क्राइम कर आर्थिक उपार्जन में लग अपने उन लालसाओं को पूरा करने लगते हैं ।


राजनीतिक पक्ष

राजनीतिक बदलाव में युवाओं की बड़ी भूमिका होती है लेकिन इसकी उम्मीद उन युवाओं से की जा सकती है जो शिक्षित और संवेदनशील हैं । लेकिन आज कल भटके युवाओं को तेज तर्रार राजनीतिज्ञ टूल्स के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं । ये सोचने वाली बात है कि जिस घर में खाने भर के पैसे नहीं हैं,उस घर के बच्चे के पास बंदूक कहाँ से आती है और उसके भीतर इतनी हिम्मत कहाँ से आजाती कि वो गोली चला दे रहा है ? हमारे बच्चे का गलत राजनीतिक उपयोग किया जा रहा है, उन्हें जाति-धर्म में बांटा जा रहा है और ये राजनेता अपने फ़ौज और ढाल के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं । और जैसा कि ऊपर कहा जा चूका है कि इस उम्र में ग्लैमर आकर्षित करता है, तो बच्चे इनकी जाल में आकर्षित हो कर फंस रहे हैं और क्राइम को अंजाम दे रहे हैं ।

तो, आइये सचेत हों अपनी नए पौध के लिए और एक बेहतर पारिवारिक ,सामाजिक, और राजनीतिक माहौल दे कर इन्हे सीचें ।


लेखक : प्रदीप प्रांजल 

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