प्रेरणात्मक कथा – माँ के आँसू


maa ke anshu story in hindi

माँ के आँसू –  यह उसकी अपनी माँ से अंतिम मुलाकात थी, हालाँकि तब उसे इस बात का इल्म नहीं था । वह शहर लोटते समय माँ से विदाई ले रहा था, तो माँ फुट-फुट कर रो पड़ी थी । वह लगातार रोए जा रही थी । उसे थोड़ा आश्चर्य हुआ था कि माँ इतना तो कभी नहीं रोई । वह कुछ समझ नहीं पाया ……..

हाँ, उसने यह जरुर किया कि जेब से रुमाल निकला और माँ के आंसू पोछने लगा । पूरा रुमाल आंसुओं से तार हो गया था । माँ अभी भी रोये जा रही थी ।

नौकरी का सवाल था । उसे किसी भी हालत में शहर लौटना था । माँ के आंसू उसे नहीं रोक सके । अलबत्ता उसने माँ के आंसुओं से भींगा रुमाल अपनी जेब में डाल लिया था । शहर पहुंचते ही माँ के चल बसने की खबर आ गई । उसने जेब से रुमाल निकाला, जो वहाँ तक गिला था । न जाने क्यों, उसने वह रुमाल अलमारी में सुरक्षित रख दिया ।

आज काफी समय बाद उससे मेरी मुलाकात हुई है । बातचीत के दौरान उसने बताया कि माँ के आंसुओं वाला यह रुमाल अभी तक उतना ही गीला है ।

कोई और होता, तो उसे इस बात पर जरुर आश्चर्य होता, लेकिन मुझे कतई नहीं हुआ है ।

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